खप्टिहा कलां। पांच घरों के मासूमों की जान चली जाने से गांव में त्योहार की खुशी पर मातम छा गया। बड़े तो भावुक हैं ही, मरने वाले बच्चों के साथी भी परिजनों से लिपटकर बिलखते रहे। हर कोई पीड़ित के घर उनके परिजनों को ढांढस बंधाते रहे। यहां तक इस गम की घड़ी में कई घरों में चूल्हे भी नहीं जले।
पैलानी थाना क्षेत्र के गुरगवां गांव में केन नदी के गइला घाट में पांच बच्चों के नदी में डूबने की घटना से कोहराम मच गया है। चार बच्चों को पहले ही निकाल लिया गया, लेकिन उनकी मौत हो गई और फिर शाम को पांचवें बच्चे विवेक को भी आठ घंटे बाद मृत अवस्था में नदी से बाहर निकाल लिया गया।
राखी के पिता रामकृपाल, विजयलक्ष्मी के पिता रामविशाल, पुष्पेंद्र के पिता दिनेश और सूर्यांश के पिता लवलेश व मृतक विवेक के पिता रामशरन ने बताया कि वह सभी गांव में ही रहकर खेती-किसानी में मजदूरी करते हैं। सभी भूमिहीन हैं।
रक्षाबंंधन का पर्व है। इसके लिए बच्चे कजलिया खाेटने के लिए नदी जाते हैं। घटना दिन भी उनके सभी बच्चे नदी में कजलिया खोटने के लिए गए थे। उन्हें क्या पता कि सभी इस तरह से पानी में समा जाएंगे। गांव के बच्चों का भी रो रोकर बुरा हाल है। पूरे गांव में मातम छा गया है।
– केन नदी के इस हादसे ने पांच जिंदगियां निगल लीं। इसमें दो घरों का चिराग बुझ गया। दो बच्चे अपने घर के इकलौते बेटे थे, जबकि एक घर में तीन भाइयों की इकलौती बहन की भी डूबने से मौत हो गई। अकेली बहन की मौत से तीनों का रो-रोकर बुरा हाल है। बार बार अपनी बहन को याद कर वे रो रहे हैं।
पांच बच्चों की मौत से राखी का त्योहार फीका पड़ गया। अंजना उर्फ राखी की मौत से तीन भाइयों की कलाई इस बार सूनी रहेगी। कजलिया खोटने गई बच्चों की टोली में राखी ही समझदार और बड़ी थी। संभवत बच्चों को बचाने में वह भी पानी में डूब गई। मृतका अंजना उर्फ राखी तीन भाइयों में अकेली बहन थी। मृतक पुष्पेंद्र एक भाई एक बहन में बड़ा था। वह कक्षा पांच में पढ़ता था। मृतका विजय लक्ष्मी पांच बहनों में दूसरे नंबर की थी। वह कक्षा सात में सिंधन कला में पढ़ती थी। मृतक सूर्यांश दो बहन और एक भाई में बड़ा था। वह गांव के आंगनबाड़ी केंद्र में कक्षा एक का छात्र था। मृतक विवेक दो भाई-बहन में सबसे छोटा था। मां ममता का रो-रोकर बुरा हाल है।
-जल शक्ति राज्य मंत्री रामकेश निषाद ने हादसे की जानकारी होने पर मृतक परिवारों के घर जाकर उन्हें सांत्वना दी। उनके साथ एडीएम उमाकांत त्रिपाठी, एसडीएम शशिभूषण व सीओ सदर अंबुजा त्रिवेदी भी रहीं। मंत्री ने मृतकाें की सूची बनाकर मुआवजे के लिए शासन को रिपोर्ट भेजने का आश्वासन दिया। एडीएम ने बताया कि सभी मृतकों के परिजनों को चार-चार लाख रुपये आर्थिक सहायता दी जाएगी।
आठ घंटे बाद घटना स्थल से मात्र 15 मीटर की दूरी पर बालक कन्नू का शव मिट्टी में दबा मिला। एसडीएम पैलानी ने जानकारी देते हुए बताया की बीच में बारिश के दौरान रेस्क्यू ऑपरेशन रोक दिया गया था। दोपहर तीन बजे फिर उसे चालू किया गया और नदी में जलधारा के बीच विवेक का शव ढूंढ लिया गया। वह घटना स्थल से पंद्रह मीटर की दूरी पर मिट्टी में दवा मिला। गोताखोर को पुरस्कृत किया गया, जबकि दो बच्चियों को भी प्रशस्ति पत्र दिया जाएगा।
