जिले में मनाया जा रहा वर्ल्ड रेबीज सप्ताह, लोगों को कर रहे जागरूक
संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। शुक्रवार को सीएमओ कार्यालय के सभागार में वर्ल्ड रेबीज नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित कार्यशाला में फार्मासिस्टों को एक दिवसीय प्रशिक्षण दिया गया। डिप्टी सीएमओ डॉ.आर एन सोनी ने बताया कि रेबीज एक जूनोटिक बीमारी है जो कुत्तों, चमगादड़, लोमड़ी आदि से इंसानों में फैलती है।
कार्यशाला में बताया गया कि रेबीज जानवरों से फैलने वाली बीमारी है, जो समय पर वैक्सीन न लगने पर जानलेवा साबित होती है। इसके लिए रेबीज नियंत्रण सप्ताह मनाया जा रहा है, जो एक अक्तूबर तक चलेगा। डॉ. सोनी ने बताया कि आमतौर पर आवारा कुत्ते या वे कुत्ते जो वैक्सीनेटेड नहीं होते हैं, उनमें यह वायरस रहता है, जोकि लार या काटने से व्यक्ति में प्रवेश कर जाता है।
इसके बारे में जागरूक करने के लिए रेबीज नियंत्रण सप्ताह मनाया जा रहा है। डिस्ट्रिक पब्लिक हेल्थ स्पेशलिस्ट डॉ. सौरभ सक्सेना ने बताया कि रेबीज के कई चरण होते हैं। रेबीज का सबसे पहला चरण इंक्यूबेशन पीरियड होता है। इस स्टेज में इंफैक्शन की शुरुआत होती है, लेकिन लक्षण दिखने शुरू नहीं होते। इसका समय 10 दिन से कुछ सालों तक हो सकता है। अगर इस स्टेज में इलाज हो जाए तो रेबीज से जान बचाई जा सकती है।
महामारी नियंत्रण रोग विशेषज्ञ डॉ. देशराज ने बताया कि जिले में सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में रेबीज क्लीनिक चलाई जा रही है। मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जिला अस्पताल में मॉडल रेबीज क्लीनिक भी चलाई जा रही है। जहां पर रेबीज वैक्सीन उपलब्ध है। संगोष्ठी में अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. वीरेंद्र सिंह, जिला मलेरिया अधिकारी मुकेश जौहरी और सहायक मलेरिया अधिकारी अजब सिंह आदि मौजूद रहे।
