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बांदा। बुंदेलखंड में नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे की रिपोर्ट में नशा करने वालों के आंकड़ों ने शासन और प्रशासन को सकते में डाल दिया है। इस बड़ी समस्या से निपटने के लिए प्रशासन ने मेडिकल स्टोर्स में सीसीटीवी कैमरों को लगाना अनिवार्य कर दिया है। कैमरों की निगरानी से नशे की दवाओं की बिक्री पर अंकुश लगाया जाएगा और जो कैमरे नहीं लगाएंगे उनके लाइसेंस निरस्त किए जाएंगे।

बुंदेलखंड में नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे की रिपोर्ट में पंद्रह साल से ऊपर के 64 फीसदी से ज्यादा पुरुष व 17 फीसदी से ज्यादा महिलाएं नशे की गिरफ्त में पाई गई हैं। नशे के रूप में गांजा, स्मैक, अफीम, कोकीन आदि आसानी से नहीं मिलता है। लेकिन नशे की गिरफ्त में फंस चुके लोग नशीली गोलियां आसानी से प्राप्त कर लेते हैं। सस्ती और दवा के रूप में आसानी से मिलने की वजह से इसका प्रयोग लगातार बढ़ता जा रहा है। इससे नशा करने वाले लोगों के मानसिक स्तर पर तो असर पड़ ही रहा है साथ ही कैंसर जैसी बीमारियों को भी बढ़ावा मिल रहा है।

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363 दुकानों में लगेंगे कैमरे

औषधि इंस्पेक्टर श्रीकांत गुप्ता ने बताया कि जिलाधिकारी के आदेश पर दवा दुकानों में सीसीटीवी कैमरे लगवाए जा रहे हैं। जनपद में दवा की 433 दुकानें है। इनमें 70 दुकानों में सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं। 363 दुकानों में कैमरे लगाने के लिए दवा विक्रेताओं को निर्देश दिए गए हैं। सीसीटीवी न लगाने वाले दुकानदारों के लाइसेंस निरस्त करने की कार्रवाई की जाएगी।

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पहले से बढ़े हैं नशे के मामले

जिला अस्पताल के डॉ. विनीत का कहना है कि पिछले एक दशक से लोगों में नशे का शौक बढ़ा है। खासकर ग्रामीण इलाकों में छोटी सी उम्र के लोग भी इसके आदी हो रहे हैं। आलम यह है कि अब यह नशीली गोलियाें का इस्तेमाल कर रहे हैं। यह दवाएं उन्हें आसानी से कम पैसों में मिल जाती हैं। चिंता की बात ये भी है कि पुरुषों के साथ महिलाएं भी नशे की जद में आ रही हैं। इस तरह के सप्ताह में छह से सात मामले जरूर आते हैं।



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