अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। आंखों के सामने गेंद, हाथ में हॉकी और मन में दद्दा मेजर ध्यानचंद की कहानी, कुछ इसी जोश और जुनून के साथ हॉकी के हुनरबाजों ने मैदान पर अपना खूब दम दिखाया। कड़ी मेहनत और लक्ष्य पर टिकी सीधी निगाह ने उनको शिखर तक पहुंचा दिया। अभावों और सीमित संसाधनों के बीच अपनी हॉकी को निखारकर राष्ट्रीय चैंपियनशिप में अपनी प्रतिभा दिखाने वाले इन हुनरबाजों की जीत और उपलब्धि कठिन साधना का परिणाम है। इसी का नतीजा है कि हॉकी इंडिया की प्रथम नॉर्थ जोन राष्ट्रीय बालक-बालिका हॉकी चैंपियनशिप में अपनी मेहनत के दम पर उन्होंने शिखर छू लिया। जीत के बाद चहेरे पर खुशी तो है, लेकिन जज्बा ओलंपिक मेडल पहनने का है। प्रतियोगिता में यूपी टीम के खिलाड़ी शाहरुख और रश्मि ने बेहतर प्रदर्शन करके हार को जीत में बदल दिया है। वहीं हरियाणा के जांबाजों ने भी अपनी हॉकी से मैदान मारकर खुद को साबित किया।
मैकेनिक के बेटे ने दागे 26 गोल
हॉकी चैंपियनशिप में सबसे ज्यादा 26 गोल करने वाले यूपी टीम के कप्तान शाहरुख ने अपने पिता का एक सपना पूरा किया है। लखनऊ के निवासी शाहरुख आठ साल से हॉकी खेल रहे हैं। उन्होंने चौथी बार नेशनल चैंपियनशिप में अपना दम दिखाया। शाहरुख के पिता तबस्सुर अली पेशे से मैकेनिक हैं। प्रतियोगिता के समापन पर जब शाहरुख को मेडल और विशेष पुरस्कार दिया गया, तो उसे उन्होंने अपने पापा के नाम किया। शाहरुख के भाई आमिर भी अंतरराष्ट्रीय हॉकी प्लेयर रहे हैं। शाहरुख का कहना है कि टूर्नामेंट में पूरी मेहनत की थी। टीम को जिता तो नहीं पाया, लेकिन सबसे ज्यादा गोल दागकर पिता का सपना पूरा किया है। अब भारतीय टीम में खेलने की तमन्ना है।
अब ओलंपिक में जाना बड़ा सपना
झांसी के आवास विकास की रहने वाली रश्मि रायकवार ने भी यूपी टीम की ओर से प्रतियोगिता में सबसे ज्यादा 13 गोल करके एक बार फिर झांसी की पहचान मेजर ध्यानचंद का मान बढ़ा दिया। गोरखपुर छात्रावास में हॉकी के गुर सीख रहीं रश्मि के पिता अशोक रायकवार टेलर हैं। वे कहती हैं कि प्रतियोगिता में अपने प्रदर्शन को लेकर काफी परेशान थीं, लेकिन मेहनत ने बड़ी कामयाबी दिलाई है। अब ओलंपिक में जाना बड़ा सपना है। बेस्ट प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट का खिताब पाने के बाद रश्मि के चेहरे पर अपने घर जाने की खुशी भी साफ नजर आई।
मजदूर पिता का बढ़ाया मान
हॉकी चैंपियनशिप जीतने वाली हरियाणा टीम के कप्तान अमित के पिता पेशे से मजदूर हैं। पिता अनिल ने कड़ी मेहनत करके अमित को हॉकी का अभ्यास शुरू कराया था। वे कहते हैं कि पिता मैच का परिणाम जानने के बाद खुश थे। अमित पिछले पांच साल से हॉकी खेल रहे हैं। इससे पहले उड़ीसा में हरियाणा की टीम को तीसरा स्थान मिला था। वे कहते हैं कि इस बार सोचकर आया था कि जीतकर ही जाऊंगा और मेहनत, टीम वर्क ने सफलता दिलाई। पिता टीम की जीत पर काफी खुश हैं।
पहली बार में ही चख लिया जीत का स्वाद
हरियाणा टीम की कप्तान दीक्षा ने पहले ही मैच में जीत का स्वाद चख लिया। 10वीं की छात्रा दीक्षा अपना पहला राष्ट्रीय स्तर का मैच खेलने आई थीं। उनके पिता नीरज मलिक का देहांत हो चुका है। पिता के निधन के बाद दीक्षा ने मां मंजू देवी की पहल पर दोबारा खेलना शुरू किया और घर और स्टेडियम मेें प्रैक्टिस करके राष्ट्रीय टीम में जगह बनाई और दिलाई।
