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अमर उजाला ब्यूरो

झांसी। दरोगा पति के सिर पर खून सवार देखकर शालिनी बुरी तरह सहम उठी थी। दरोगा हाथ में रिवाल्वर लेकर गोलियां दाग रहा था लेकिन, शालिनी ने हिम्मत नहीं हारी। हाथ में कोहनी के ऊपर दो गोलियां लगने से वह खून से लथपथ हो गई। गर्भवती पत्नी को घायल देखकर भी दरोगा शशांक का गुस्सा शांत नहीं हुआ। शालिनी का कहना है कि शशांक के फिर फायर झोंकने पर वह हिम्मत करके बाहर की ओर भागी। बाहर जूते का रैक रखा हुआ था। उसकी आड़ लेने की वजह से वह शशांक को नजर नहीं आई। उसी की आड़ लेकर वह पड़ोसी के घर तक पहुंची। वहां पहुंचने के बाद उसकी जान बची। शोर शराबा सुनकर पड़ोस के लोग भी जुट गए।

शालिनी मूल रूप से मऊरानीपुर ब्लाक के लहचूरा गांव की रहने वाली है। उसके पिता अखिलेंद्र रावत भी पुलिस विभाग में दरोगा हैं। इन दिनों कानपुर देहात में एसपी कार्यालय में उनकी तैनाती है। शालिनी के पिता अखिलेंद्र के मुताबिक दिसंबर 2021 में शादी की थी। शादी के कुछ माह बाद से ही विवाद होने लगा था। शशांक मूल रूप से बांदा का रहने वाला है। उसके पिता दया प्रसाद मिश्र भी पुलिस विभाग में दरोगा थे लेकिन, वर्ष 2015 में बीमारी के चलते उनकी मृत्यु हो गई। वर्ष 2016 में शशांक की मृतक आश्रित कोटे में भर्ती हुई। ट्रेनिंग से लौटने के बाद वर्ष 2019 से शशांक झांसी के कई थाने एवं चौकियों में तैनात रहे। शालिनी के परिजनों का कहना है शादी के बाद से दहेज के लिए शशांक की मां, उसका भाई अक्सर परेशान करते थे। करीब 30 लाख रुपये दहेज में देने के बाद भी सोने की 50 अंगूठी मांगी जा रहीं थीं। शालिनी के पिता ने हत्या की साजिश रचने का आरोप लगाया है। उधर, एसएसपी राजेश एस का कहना है कि मामले की जांच के आदेश दिए गए हैं। जल्द ही रिपोर्ट देने को कहा गया है।



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