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ओमप्रकाश दुबे

झांसी। मध्यप्रदेश चुनाव की घोषणा होते ही बुंदेलखंड में भी राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। दोनों ही प्रमुख दल भाजपा और कांग्रेस इस बार फूंक- फूंक कर सियासी कदम रख रहे हैं। अब तक जारी की गईं प्रत्याशियों की सूचियों में चंबल, बघेलखंड तथा महासमुद क्षेत्र के अधिकांश उम्मीदवारों की घोषणा कर दी गई है, जबकि बुंदेलखंड की अधिकांश सीटों पर दोनों ही दल असमंजस की स्थिति में हैं। इस बार भाजपा के अपने सर्वे में बुंदेलखंड (एमपी क्षेत्र) के कई विधायकों की हालत खराब आ रही है, ऐसे में इन विधायकों के टिकट पर भी तलवार लटक रही है। बुंदेलखंड की करीब तीस में से भाजपा ने अभी सिर्फ पंद्रह सीटों पर ही अपने प्रत्याशी घोषित किए हैं, जबकि पंद्रह प्रत्याशियों को लेकर मंथन जारी है। इनमें से ऐसे कई विधायक हैं जिनकी पार्टी के सर्वे में हालत काफी खराब मानी जा रही है। अगर हम बुंदेलखंड की सीटों पर नजर डालें तो निवाड़ी, पृथ्वीपुर, जतारा, टीकमगढ़ को लेकर भाजपा में अब तक पेच फंसा हुआ है। इस क्षेत्र की एक मात्र सीट खरगापुर पर उमाभारती के भतीजे राहुल लोधी के नाम की घोषणा कर दी है, बाकी सीटों पर गहन मंथन जारी है। अगर हम बात करें छतरपुर जिले की तो चंदला और विजावर विधानसभा सीट को छोड़कर छह में से चार सीटों पर उम्मीदवार घोषित कर दिए गए हैं। दमोह जिले की पांच सीटों में से केवल दमोह और गुन्नौर सीट पर ही अभी तक उम्मीदवार घोषित किए गए हैं। वहीं दतिया जिले की तीन में से दो सीटों पर भाजपा ने प्रत्याशी घोषित कर दिए हैं, इनमें दतिया सदर की हाई प्रोफाइल सीट पर प्रदेश के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा पर पार्टी ने एक बार फिर दाव लगाया है, वहीं सेंवढ़ा से प्रदीप अग्रवाल को उतारा गया है, भांडेर सीट पर अभी विचार चल रहा है। सागर की सभी सात सीटों पर उम्मीदवार घोषित कर दिए गए हैं। इनमें गोविंद सिंह तथा गोपाल भार्गव प्रदेश सरकार के दो मंत्री मैदान में हैं।

जनअसंतोष और भाजपा की अंतर्कलह को भुनाना चाहती है कांग्रेस

कांग्रेस अब तक सौ से ज्यादा उम्मीदवारों के नाम तय कर चुकी है पर ऐसा माना जा रहा है कि इनकी अधिकृत घोषणा नवरात्रि में किए जाने की संभावना है। कांग्रेस इस बार फूंक-फूंक कर कदम रख रही है। पार्टी द्वारा तय की गई लाइन में जिले से बाहर का व तीन बार के हारे व्यक्ति को उम्मीदवार नहीं बनाया जाएगा। बुंदेलखंड की बीस से अधिक सीटों पर स्वयं भाजपा के सर्वे में उनके विधायकों की हालत पतली बताई जा रही है, इन विधायकों के नाम फिलहाल सूची में रोक दिए गए हैं। इन सीटों पर कांग्रेस की पैनी नजर है। इनमें निवाड़ी, पृथ्वीपुर, जतारा, टीकमगढ़ के अलावा छतरपुर की कुछ सीटों पर भी भाजपा अपने को कमजोर मान रही है तथा उम्मीदवारी को लेकर पार्टी गहन मंथन कर रही है, कई विधायकों के टिकट भी काटे जा सकते हैं। इन सीटों पर कांग्रेस ने भी अब तक अपने उम्मीदवार घोषित नहीं किए हैं। वह भाजपा की रणनीति का इंतजार कर रही है, उसके बाद ही वह अपने पत्ते खोलेगी।

इस बार बुंदेलखंड के अलावा चंबल क्षेत्र में भी कांटे की लड़ाई

बीते चुनाव में ज्योतिरादित्य सिंधिया कांग्रेस में ही थे, इस कारण ग्वालियर चंबल क्षेत्र की कांग्रेस की कमान उनके ही हाथ में थी, पर इस बार परिदृश्य बदला हुआ है। सिंधिया भाजपा में आ चुके हैं, इस कारण इस क्षेत्र में कांग्रेस को अतिरिक्त मेहनत करनी होगी। पर, कांग्रेस नेता ऐसा मानकर चल रहे हैं, कि सिंधिया खेमे के कांग्रेस से आए भाजपाई, तथा मूल भाजपाई हमेशा से पारंपरिक प्रतिद्वंद्वी रहे हैं, ऐसे में दोनों गुटों का एक साथ काम करना काफी मुश्किल होगा। कांग्रेस इस अंतर्कलह पर गिद्ध दृष्टि जमाए बैठी है। कांग्रेस के नेता कहते हैं, भाजपा तीन खेमों में बंटी है, भाजपा सिंधिया, भाजपा शिवराज और भाजपा नाराज । ऐसे में चंबल ग्वालियर में भाजपा को कांग्रेस से कांटे की लड़ाई लड़ना होगी। इस संबंध में भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव व मध्यप्रदेश भाजपा के कद्दावर नेता कैलाश विजवर्गीय का कहना है कि मध्यप्रदेश में भाजपा पूर्ण बहुमत से जीतेगी, न केवल बुंदेलखंड बल्कि समग्र मध्यप्रदेश में भाजपा के पक्ष में लहर है।



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