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संवाद न्यूज एजेंसी

झांसी। देखो मम्मी ये क्या हो गया, मैं भी अब दूसरे बच्चों की तरह चल सकता हूं। पापा मुझे अंकल ने ये गिफ्ट दिया है, मैं अब बिना किसी सहारे के चल सकूंगीं। चेहरे पर मुस्कान लिए कुछ ऐसे ही दिव्यांग बच्चे नगर संसाधन केंद्र परिसर में दौड़ते नजर आए। समेकित शिक्षा अभियान के तहत दिव्यांग बच्चों को सहायक उपकरण दिए गए। उपकरण पाने के बाद खुश होते बच्चों को देखकर अभिभावक भी भावुक हो गए।

उपकरण वितरण शिविर का शुभारंभ सदर विधायक रवि शर्मा, एडी बेसिक अरुण कुमार शुक्ल और बीएसए नीलम यादव ने किया। शिविर में बड़ागांव, बबीना, चिरगांव और नगर क्षेत्र के 76 दिव्यांग बच्चों को 122 उपकरण बांटे गए। एलिम्को कानपुर के ऑडियोलाजिस्ट हरिशंकर और पुनर्वास विशेषज्ञ अमर बहादुर ने दिव्यांग विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों को उपकरण के प्रयोग की जानकारी दी। बच्चों को ट्राईसाइकिल, व्हीलचेयर, सीपी चेयर, बैसाखियां, रोलेटर, ब्रेल किट, श्रवण यंत्र किट, कैलीपर्स बांटे गए। इस अवसर पर डीसी रत्नेश त्रिपाठी, बीईओ ब्रह्मनारायण श्रीवास्तव, राघवेंद्र यादव, अनुज कुमार, प्रीति सिंह, वीनू, फिजियोथेरेपिस्ट राणा प्रताप सिंह, स्पेशल एजुकेटर चंदा त्रिपाठी, आशीष तिवारी, हरगोविंद सिंह, घनश्याम भारती, ऊषा वर्मा उपस्थित रहे।

अंजली की तो खुशी का कोई ठिकाना न रहा

बबीना ब्लॉक के बैजपुर गांव की अंजली जन्मजात दिव्यांग है। अभिभावक ही उसको थोड़ा बहुत ही घर से बाहर ले जाया करते थे। शिविर में अंजली को ट्राई साइकिल दी गई। ट्राई साइकिल पाकर अंजली की खुश का ठिकाना न रहा। काफी देर तक अंजली खुशी में ट्राई साइकिल चलाने का प्रयास करती रही।

अब अपने पैरों से घूम सकूंगा

सीपरी बाजार के 11 वर्षीय श्रेयांस भी एक पैर से दिव्यांग हैं। सरस्वती ज्ञान मंदिर में कक्षा 4 के छात्र श्रेयांस भी व्हील चेयर पाकर बहुत खुश हुए। श्रेयांस ने कहा कि अब वह थोड़ा बहुत खुद से भी घूम सकता है।

रोलेटर के सहारे चलने की कोशिश

प्राथमिक विद्यालय तालपुरा में कक्षा दो के छात्र अल्फेज कुरैशी को व्हीलचेयर, रोलेटर और जूते दिए गए। अल्फेज रोलेटर के सहारे चलने का प्रयास करता रहा। व्हीलचेयर मिलने से अभिभावक को उसे विद्यालय पहुंचाने में मदद मिलेगी।

बाहरी दुनिया से जुड़ सकेगा समर

नंदनपुरा के नौ वर्षीय समर को उपकरण वितरण कैंप में उनकी मां लेकर आई थीं। समर को स्पेशल एजुकेटर घर जाकर पढ़ाते हैं। व्हीलचेयर से समर को घर से बाहर लेकर जाना, सामाजिक माहौल में लाना आसान हो जाएगा।

देविका भी घर से बाहर खेल सकेगी

सात वर्षीय देविका व्हीलचेयर, रोलेटर और जूते पाकर बहुत खुश थी। उसके परिजनों का कहना था कि उन्होंने पहले भी उपकरण के लिए आवेदन किया था। इस बार देविका का नाम आया है। अब वह भी अन्य बच्चों की तरह घर के बाहर खेल सकेगी।



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