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बांदा। मकान के सामने सहन की कब्जेदारी व मुकदमे की रंजिश में हुई हत्या के तीन दोषियों को प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश मोहम्मद कमरूज्जमा खान की अदालत ने मंगलवार को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही तीनों पर 15-15 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना अदा न करने पर 6-6 माह की अतिरिक्त सजा काटनी होगी।

अपर जिला शासकीय अधिवक्ता सुशील तिवारी व सहायक शासकीय अधिवक्ता श्रवण कुमार तिवारी ने बताया कि जसपुरा थानाक्षेत्र के गडरिया गांव निवासी दीपक शर्मा ने 30 अक्तूबर 2016 को प्राथमिकी दर्ज कराई कि उसके पिता कमलेश शर्मा से पड़ोसी श्रीराम तिवारी पुत्र देशराज तिवारी के मकान के सामने सहन (घर के सामने छूटी हुई जमीन) की कब्जेदारी व मुकदमे की रंजिश को लेकर विवाद चल रहा था। उसी रंजिश को लेकर 30 अक्तूबर 2016 को समय करीब नौ बजे सुबह श्रीराम तिवारी, विशंभर तिवारी व रमेश उर्फ मुन्ना पुत्रगण देशराज तिवारी, बबलू उर्फ महेंद्र पुत्र रमेश उसके पिता को अपने दरवाजे के सामने से पकड़कर घर के अंदर ले गए और सभी लोगों ने मिलकर उसके पिता की हत्या कर दी। पिता की लाश को अपने घर के अंदर जलाकर भाग गए।

मौके पर खून के धब्बे व मल मिला था। मामले में आरोप पत्र न्यायालय में पेश किया गया। दौरान मुकदमा विशंभर तिवारी की जेल में मृत्यु हो गई। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन की ओर से नौ गवाह पेश किए गए। पत्रावली में उपलब्ध साक्ष्यों व अधिवक्ताओं की दलीलें सुनने के बाद न्यायाधीश ने अपने 56 पृष्ठीय फैसले में तीनों को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई। जुर्माने की दो तिहाई धनराशि मृतक के पुत्रगण को नियमानुसार प्रतिकर के रूप में अदा की जाएगी।



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