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चित्रकूट। करीब 15 साल से पुल बनाने की मांग अफसरों और जनप्रतिनिधियों ने नहीं पूरी की तो ग्रामीणों ने खुद ही समस्या के निदान की ठानी। ग्रामीणों ने बांस-बल्ली के सहारे खुद ही चार-पांच दिन में पुल बना डाला। शनिवार को बनकर तैयार हुए इस पुल से ग्रामीणों की राह कुछ हद तक आसान हो जाएगी।

रामनगर विकास खंड क्षेत्र के बेलरी गांव के संपर्क मार्ग पर रैपुरा बांध का पानी बीच रास्ते पर भरा रहता है। इससे ग्रामीण खेतों से होकर निकलने के लिए मजबूर थे। कई बार प्रभास महासभा के सहयोग से ग्रामीणों ने आंदोलन भी किया। धरना-प्रदर्शन कर अनशन पर भी बैठे। जनप्रतिनिधियों ने भी समस्या के निदान के लिए आश्वासन तो दिया, लेकिन पुल नहीं बना। इससे मजबूर होकर ग्रामीणों ने खुद बांस और बल्ली से पुल का निर्माण किया है।

प्रधान रामकेश ने बताया कि गांव का करीब डेढ़ किलोमीटर संपर्क मार्ग कच्चा है। रास्ते के पास ही गुंता बांध है, जिसका पानी रास्ते में भरा रहता है। इससे ग्रामीणों को आने-जाने में परेशानी होती है। इस समस्या से निजात पाने के लिए ग्रामीणों ने खुद कच्चा पुल बना लिया।

प्रभास महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष लवलेश विराग व गांव के शंकर, चंदन व चुन्ना राजपूत ने बताया कि जब पूरी तरह से हार गए तो मजबूरी में लकड़ी के सहारे पुल बनाने को मजबूर हो गए। अब इसी पुल के सहारे आएंगे।

आए दिन होती रहती थीं दुर्घटनाएं

संपर्क मार्ग में जिस स्थान पर जलभराव है, वहां आए दिन दुर्घटनाएं भी होती हैं। पिछले साल जुलाई में एक बच्चे की डूबकर मौत हो गई थी। हंसराज की पत्नी सुधा इलाज कराने के लिए इसी रास्ते जा रही थीं। वह बच्चा गोद में लिए थीं। पैर फिसल जाने से दोनों पानी में गिर गए। इससे बच्चे की मौत हो गई। इसके अलावा कई ग्रामीण घायल भी हो चुके हैं।

ग्राम पंचायत के पास नहीं है बजट

प्रधान रामकेश ने बताया कि वर्ष 2007 में रपटा का निर्माण किया गया था, जो निचले स्तर पर बनी हुआ। ऐसे में सड़क पर पानी भर जाता है। ग्राम पंचायत में इतना बजट नहीं है कि पुल का निर्माण किया जा सके।



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