कोंच। ऐतिहासिक रामलीला के 171वें महोत्सव में शनिवार की दोपहर रामलीला भवन पर श्रीराम का राज्याभिषेक हुआ। गुरु वशिष्ठ ने प्रभु श्रीराम और माता सीता को सिंहासन पर प्रतिष्ठित कर उनका राज तिलक किया और आरती उतारी। इसी के साथ रामलीला महोत्सव का समापन हो गया। चंद्रग्रहण का सूतक काल प्रारंभ होने के पहले तक सजे रहे श्रीराम दरबार में दर्शनार्थियों का तांता लगा रहा और लोगों ने राम, लक्ष्मण, भरत, रिपुदमन और सीता की मोहिनी छवि अपनी आंखों में बसाई। इसके बाद पांचों मूर्तियों का विसर्जन हुआ और उनको विदाई देकर घरों को रवाना किया गया।
धर्मादा रक्षिणी सभा की रामलीला में शनिवार दोपहर श्रीराम राज्याभिषेक के दौरान गुरु वशिष्ठ ने प्रभु राम और माता सीता को उच्च सिंहासन पर प्रतिष्ठित कर राज तिलक किया और आरती उतारी। इस पर लोगों ने पुष्पवर्षा की। इसके बाद धर्मादा रक्षिणी सभा, रामलीला समिति और इसकी उपसमितियों अभिनय विभाग, सीनरी विभाग, शृंगार विभाग, सांकेतिक विभाग, गश्त विभाग, संगीत विभाग आदि के पदाधिकारियों के अलावा कोतवाल नागेंद्र कुमार पाठक ने भी झांकी की आरती उतारी।
चारों वेदों ने ब्राह्मण वेश में आकर प्रभु श्रीराम का गुणगान किया। भगवान भोले शंकर ने राम दरबार में आकर आनंदित होकर नृत्य किया। प्रभु श्रीराम ने लंका विजय के बाद अपने साथ आए विभीषण, सुग्रीव, अंगद, निषादराज गुह आदि को उपहार देकर विदा किया। शंकर की भूमिका केशव बबेले, हनुमान गौरव तिवारी, अंगद रामकिशोर पुरोहित, निषादराज गुह हेमू प्रजापति, सुग्रीव आकाश शांडिल्य, विभीषण प्रशांत चौहान, जामवंत छोटे सोनी ने निभाई। इस दौरान विजय गुप्ता, विनोद दुबे, मुकेश सोनी, सुशील निरंजन, राहुल तिवारी, गौरव, मोहनदास नगाइच, संतोष तिवारी आदि रहे।
