बांदा। आत्महत्या के लिए प्रेरित करने के मामले में दो महिला समेत तीन दोषियों को जिला एवं सत्र न्यायाधीश डॉ. बब्बू सारंग की अदालत में सात-सात वर्ष सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई। साथ ही तीनों पर 20-20 हजार रुपये का अर्थ दंड भी लगाया गया। अर्थ दंड अदा न करने पर छह-छह माह की अतिरिक्त सजा काटनी होगी। जुर्माने की आधी धनराशि पीड़ित पक्ष को दी जाएगी। तीनों दोषियों का सजायावी वारंट बनाकर पुलिस हिरासत में जेल भेज दिया गया है।
जिला शासकीय अधिवक्ता विजय बहादुर सिंह परिहार व अपर शासकीय अधिवक्ता उमा शंकर पाल ने बताया कि कोतवाली नगर बांदा में कानपुर जिले के घाटमपुर थाना क्षेत्र के पतारा गांव निवासी राज नारायण सविता ने चार अप्रैल 2017 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें बताया कि दो अप्रैल 2017 को सुबह 11 बजे पत्रकार व पतारा चौकी के सिपाही की ओर से सूचना मिली कि सचिन की बांदा में अमित लॉज में मृत्यु हो गई है।
जब परिजन वहां पहुंचे तो शव लॉज के बजाय मोरचरी में रखा मिला। लॉज में जब जानकारी की गई तो पता चला कि पारिवारिक चाची गुड्डन, उसकी बहन व उसके साथी भी सचिन के साथ थे। शंका जताई कि चाची व उसकी बहन और साथी ने मिलकर हत्या की है। रिपोर्ट दर्ज होने के बाद विवेचक द्वारा विवेचना करने के उपरांत बताया गया कि गुड्डन, पत्नी सोनू निवासी पतारा, हिना पत्नी विजय करन सविता निवासी सैमरी तिंदवारी और छोटू सविता निवासी गुरेह थाना कोतवाली देहात ने मिलकर रुपयों की मांग कर उसे मानसिक प्रताड़ित कर रहे थे।
इसी वजह से उसने फंदा लगाकर आत्महत्या की है। पीएम रिपोर्ट में भी आत्महत्या आया। मामले का आरोप पत्र न्यायालय में तीनों के विरुद्ध पेश किया गया। सुनवाई के दौरान अभियोजन की ओर से नौ गवाह पेश किए गए। न्यायाधीश ने 20 पृष्ठीय फैसले पर दो महिलाएं समेत तीनों को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई।
