संवाद न्यूज एजेंसी
झांसी। रबी के सीजन में पूरे बुंदेलखंड के किसान चने की खेती को लाभ की फसल मानते हैं लेकिन, जलवायु परिवर्तन और भीषण गर्मी के चलते उन्हें वह उपज नहीं मिल पाती, जिसकी उम्मीद किसानों को है। किसानों की इसी समस्या का समाधान ढूंढने के लिए अब केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय ने देशभर में पैदा होने वाली चने की किस्मों पर शोध शुरू किया है। जिसमें चने की ऐसी किस्म तैयार की जा रही है जो अधिक गर्मी पड़ने पर भी किसानों को लाभ दिला सके।
दरअसल पूरे बुंदेलखंड में लगभग 3 लाख हेक्टेयर भूमि पर 26 हजार से अधिक किसान चने की खेती करते हैं। लेकिन, किसानों के सामने सबसे बड़ी समस्या यह है कि फरवरी और मार्च में अपेक्षाकृत अधिक गर्मी पड़ने लगती है। ऐसे में चने की गुणवत्ता प्रभावित होने के चलते किसानों को उम्मीद के अनुरूप पैदावार नहीं मिल पाती। इसी समस्या के समाधान के लिए केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने पूर्वी उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात, पंजाब व हरियाणा में पैदा होने वाले चने की किस्म को विश्वविद्यालय में एकत्र कर उनकी क्रॉस ब्रीडिंग कराना शुरू किया है। जिसमें उनका लक्ष्य यह है कि यहां ऐसी चने की किस्म को विकसित किया जाए, जो बुंदेलखंड की गर्मी को सहन करने के साथ ही किसानों को लाभ भी दे। विश्वविद्यालय ने यहां कृषि फार्म पर लगभग एक हजार किस्म की क्रास ब्रीडिंग कराते हुए उन्हें रोपा है।
संस्थान देशभर में पैदा होने वाले चने की एक हजार किस्म पर शोध कर रहा है। जिसमें अधिक गर्मी के समय चना की उपज प्रभावित न हो। क्वालिटी भी खराब न हो। इस शोध की सफलता के बाद बुंदेलखंड के किसानों को नुकसान से बचाया जा सकेगा।
डॉ. अंशुमन सिंह, कृषि विशेषज्ञ, केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय।
