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ललितपुर-जाखलौन। सरकार ने भले ही खुले में शौच बंद करने के लिए स्वच्छता मिशन के तहत लाखों रुपये खर्च किए हों, लेकिन हकीकत इसके विपरीत ही है। ग्रामीण इलाकों के सामुदायिक शौचालयों का संचालन ही नहीं हो रहा है। इनमें अक्सर ताले लगे नजर आते हैं। अधिकांश गांव में सामुदायिक शौचालय अधूरे पड़े हुए हैं। साथ ही घर-घर शौचालय बनाने का दावा किया जा रहा है, लेकिन हकीकत इसके विपरीत ही है।

ग्रामीण इलाकों में सामुदायिक शौचालयों की देखरेख की जिम्मेदारी समूहों को सौंपी गई है। अधिकांश में प्रधानों की सांठगांठ वाले समूूहों के सदस्याें को कार्य सौंपा गया है, जिसके चलते वह सिर्फ फोटो खींचकर पंचायती राज विभाग जिलास्तरीय ग्रुप पर डाल देते हैं। इसके बाद बंद कर चले जाते हैं। इससे उस गांव में बाहर से आने वाले लोगों को बाहर ही नित्य क्रिया से निवृत्त होना होता है। विकास खंड बिरधा की ग्राम पंचायत धौर्रा, मादौन में तो यही हाल है।

यह है जनपद में सामुदायिक शौचालयों की स्थिति

विकास खंड का नाम- कुल सामुदायिक शौचालय

बार – 59

बिरधा – 83

जखौरा – 85

मड़ावरा – 58

महरौनी – 66

तालबेहट – 51

योग – 402

सभी सामुदायिक शौचालय समूह के हैंडओवर है यहां से मॉनिटरिंग सेल बना दिया है एनआरएलएम को भी पत्राचार कर रहे है 15 दिनों में अपडेट कराएं जो समूह काम नही कर रहे है उनकी जगह दूसरे समूह को हैंडओवर करने की प्रक्रिया चालू कर दी गई है। नवीन मिश्रा, जिला पंचायत राज अधिकारी।

पंचायत से बराबर पैसा जा रहा है समूह के लिए समूह अपना काम जिम्मेदारी से नही कर रहे है महिलाओं का समूह है कुछ कह नही सकते है।-धीरज यादव, ग्राम प्रधान धौर्रा

पिछले दो साल पहले समूह के हैंडओवर किया गया, समूह कोई काम नही कर रहे हैं, इसके विषय में आलाधिकारियों को अवगत करा दिया गया है। -सुदामा मिश्रा, ग्राम प्रधान मादोंन



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