प्रोविजनल अंकतालिका जारी करने में सामने आई बीयू की बड़ी लापरवाही
छात्रा के भी वास्तविक मार्कशीट में घट गए 11 अंक – दोनों विद्यार्थियों ने ले लिया डीएलएड में प्रवेश, जमा कर दी फीस, अब निरस्त होने का खतरा
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय द्वारा छात्रों को प्रोविजनल मार्कशीट जारी करते समय जबरदस्त लापरवाही बरती जा रही है। दो ताजा मामले सामने आए हैं, जिसमें छात्र-छात्रा के प्रोविजनल मार्कशीट में कुछ और वास्तविक मार्कशीट में कुछ नंबर दिए गए हैं। यही नहीं, छात्र को तो एक विषय में 35 में 36 नंबर तक दे डाले। दोनों विद्यार्थियों ने ही डीएलएड में प्रवेश ले लिया है। अब 11-11 नंबर घटने से प्रवेश निरस्त होने का खतरा मंडराने लगा है।
बुंदेलखंड महाविद्यालय में पढ़ने वाले अमन चौबे और शिवानी चौबे ने इसी साल बीए पास किया है। बीयू की तरफ से अमन को जो प्रोविजनल मार्कशीट जारी की गई थी, उसमें 900 में 633 अंक दिए गए थे। खास बात ये है कि पर्यावरण शिक्षा विषय में छात्र को 35 में 36 नंबर दे डाले। जब छात्र को वास्तविक मार्कशीट मिली तो उसमें इस विषय में 35 में 25 अंक थे। ऐसे में प्राप्तांक भी घटकर 900 में 622 हो गए। इसी तरह, शिवानी के प्रोविजनल मार्कशीट में 900 में 615 नंबर दर्ज थे। मगर जब वास्तविक मार्कशीट मिली तो उसके अंक घटकर 604 हो गए। छात्र की प्रोविजनल मार्कशीट में भी पर्यावरण शिक्षा के अंक 35 में 34 और वास्तविक अंकपत्र में 23 दर्ज हैं। छात्र-छात्रा ने बताया कि उन्होंने प्रोविजनल मार्कशीट के आधार पर डीएलएड में प्रवेश ले लिया है। प्रोविजनल में मिले अंकों के आधार पर ही उनकी मेरिट भी तैयार हुई है। चूंकि, प्रवेश लेने के बाद वास्तविक दस्तावेजों का भी सत्यापन होता है। ऐसे में छात्र-छात्रा का प्रवेश निरस्त होने का खतरा पैदा हो गया है। विद्यार्थियों ने फीस भी जमा कर दी है। अब दोनों विद्यार्थी काफी परेशान हैं। शनिवार को विद्यार्थी बीकेडी पहुंचे थे। वहां से उन्हें बीयू भेजा गया। परीक्षा नियंत्रक से मिलकर भी उन्होंने शिकायत दर्ज कराई।
जिसने की गलती, उस पर हो कार्रवाई
झांसी। बीयू के पुरातन छात्र समिति सदस्य रसकेंद्र गौतम का कहना है कि विश्वविद्यालय का स्टाफ जानबूझकर छात्रों का मानसिक उत्पीड़न कर रहा हैं। एक तरफ, नैक के नाम पर वाहवाही लूटी जा रही है। दूसरी तरफ, छात्रों की प्रोविजनल मार्कशीट को मजाक बनाकर रख दिया है। इस मामले में गलती करने वाले के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है।
वर्जन..
छात्र-छात्रा ने प्रोविजनल मार्कशीट का सत्यापन बीकेडी प्राचार्य से करवाया है। जबकि, उन्हें बीयू से करवाना चाहिए था। बीयू से सत्यापन होने पर अंकों की जांच करवाकर ही मार्कशीट सत्यापित की जाती है। प्रोविजनल मार्कशीट में लिखा होता है कि किसी भी विसंगति पर बीयू का रिकार्ड ही अंतिम माना जाएगा।
– राजबहादुर, परीक्षा नियंत्रक, बीयू।
