नगर के प्रबुद्ध जनों का हुआ सम्मान
संवाद न्यूज एजेंसी
तालबेहट। सोमवार को नगर के पारसनाथ दिगंबर जैन मंदिर में मुनि विनम्र सागर की मौजूदगी में बड़े बाबा भगवान आदिनाथ स्वामी का 1008 कलशों से महामस्तिकभिषेक हुआ। इस मौके पर नगर के प्रबुद्ध जनों को समाज द्वारा सम्मानित किया गया। धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि विनम्र सागर ने भगवान आदिनाथ की महिमा का वर्णन किया।
पंचकल्याणक महामहोत्सव के चलते मुनि विनम्र सागर ससंघ नगर में है। सुबह बाल ब्रह्मचारी अविनाश के निर्देशन में सामूहिक अभिषेक शांतिधारा के बाद भगवान आदिनाथ स्वामी का 1008 कलशों से महामस्तिकभिषेक एवं पूजन विधान का आयोजन हुआ। जिसमें श्रद्धालुओं ने पुण्यार्जन किया। धर्म सभा को संबोधित करते हुए मुनि विनम्र सागर महाराज ने भगवान आदिनाथ की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि उनकी महिमा अवरणीय है, जिसका वर्णन करना मुश्किल है। उन्होंने पंच कल्याणक महोत्सव की सफलता के लिए सभी नगरवासियों से तन, मन और धन से सहयोग का आव्हान किया। इस मौके पर मुनि ने राम चरित्र मानस सहित बाल्मीकि जी के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए कहा कि यह वर्ष काफी महत्वपूर्ण है। इस वर्ष आयोध्या में भगवान राम को भव्य मंदिर में भगवान राम विराजमान हो रहे हैं।
00
बॉक्स में
प्रबुद्ध जनों का हुआ सम्मान
नगर के लगभग दो दर्जन लोगों का समाज की ओर से सम्मान भी किया गया। जिसमें शिक्षा विद, राजनैतिक, जनप्रतिनिधि, चिकित्सक एवं अन्य समाज के गणमांय लोग शामिल रहें। जिसका शुभारम्भ शिक्षाविद जगदीश चंद्र बिलगैयां, बृजबिहारी लाल आदि ने आचार्य श्री के चित्र अनावरण एवं दीप प्रज्वलन कर किया। जिसमें ब्लॉक प्रमुख विजय सिंह,अध्यक्ष पुनीत सिंह, पूर्व ब्लॉक प्रमुख महेंद्र पाल सिंह यादव, कवि राम सेवक पाठक, डॉ.हरिश्चंद्र झा, अजय खत्री आदि प्रमुख रहे।
0000
यह रहे मौजूद
कार्यक्रम को सफल बनाने में समाज के अध्यक्ष अरूण मोदी, महामंत्री अजय जैन, प्रिंस जैन, देवेंद्र, अशोक चौधरी, कमल मोदी, संत मिठया,नंदू पहलवान, रीतेश, प्रीतेश, सौरभ, राकेश, यशपाल, विशाल आदि सहित भारी संख्या में स्वजायीय लोग मौजूद रहे।
000
40
कर्म बंधन से मुक्त होना ही मोक्ष है-विन्रम सागर महाराज
नेमिनाथ भगवान का मनाया गया मोक्ष कल्याणक
संवाद न्यूज एजेंसी
बानपुर। श्री दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र बानपुर में हो रहे नेमिनाथ जिनविंब पंचकल्याणक महोत्सव के अंतिम दिन मोक्ष कल्याण मनाया गया। पाषाण से भगवान बनने की प्रक्रिया देख श्रवकजन अभिभूत हो गए।
सोमवार सुबह आठ बजे श्री जी का अभिषेक शांति धारा की गई उपरांत देव शास्त्र गुरु की पूजन व भगवान नेमिनाथ का मोक्ष कल्याण दिखाया और मोक्ष कल्याण की पूजन कर विश्व शांति महायज्ञ किया। अग्नि कुमार के देवों द्वारा भगवान नेमिनाथ का मोक्ष कल्याणक कि क्रियाए कि गई। आचार्य विनम्र सागर महाराज ने कहा कि कर्म बंधन से मुक्त होना ही मोक्ष है संसार में कर्मों के कारण ही जीव परिभ्रमण करता है यह जीव जब कर्मों से रहित हो जाता है तो लोग के अग्रभाग में सिद्ध शीला पर विराजमान हो जाता है जैन दर्शन में इसी को ही मोक्ष कहते हैं। भगवान नेमिनाथ ने भी गिरनार पर्वत पर दिगंबर दीक्षा धरण की और वहीं पर चार घतिया कर्मों का अक्षय किया केवल ज्ञान को प्राप्त किया पश्चात कुबेर इंद्र के द्वारा समोसारण की रचना की और दिव्या ध्वनि के माध्यम से भव्य जीवन को धर्म का उपदेश दिया। करीब सात सौ वर्षों तक देश देशांतरों में भ्रमणकर अंत में गिरनार पर्वत से संपूर्ण कर्मों का क्षय कर निर्माण को प्राप्त किया। उन्होंने कहा इस कड़कड़ाती ठंड में दिगंबर जैन संत निर्भीक होकर के अपनी तप साधना में लीन रहते हैं। श्रवक जन भी अपने घर परिवार को छोड़कर के पंचकल्याणक महोत्सव देखने के लिए आ रहे हैं उनकी प्रभु भक्ति व संत के प्रति आस्था का धोतक है।
