Spread the love


संवाद न्यूज एजेंसी

ललितपुर। शहजाद बांध पर करीब 90 करोड़ की लागत से शुरू शहजाद स्प्रिंकलर सिंचाई परियोजना को पूरा करने में वन विभाग बाधा बना है। परियोजना के लिए बिछाई जाने वाली 39 किलोमीटर की विद्युत लाइन में दो किलोमीटर का क्षेत्र वन विभाग में आ रहा है। बिजली के खंभे लगाने के लिए अब तक वन विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र नहीं मिला है, इससे यह परियोजना प्रभावित हो रही है।

तहसील तालबेहट क्षेत्र में शहजाद नदी पर 1973 में शहजाद बांध का निमार्ण शुरू हुआ था। यह बांध 1992 में बनकर तैयार हुआ। इसका पूर्ण जलस्तर 322.00 मीटर है। बांध से 116.60 किलोमीटर लंबी नहर निकली है, इससे 14,403 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई की जाती है। कुछ वर्ष पूर्व शासन ने शहजाद बांध पर पायलट प्रोजेक्ट के तहत 90 करोड़ रुपये की लागत से स्प्रिंकलर सिंचाई परियोजना का निर्माण शुरू कराया था। इससे गांव पारौन, रजपुरा, बरौदाडांग की कृषि भूमि को पानी दिया जाना प्रस्तावित है। परियोजना के लिए यहां एक विद्युत सब स्टेशन बनाया गया है। बांध के पास निर्मित सब स्टेशन तक कल्यानपुरा सब स्टेशन से 39 किलोमीटर लाइन बिछाई जानी थी, लेकिन लाइन के काम में वन विभाग ने अड़ंगा डाल दिया। लाइन बिछाए जाने वाले रास्ते में करीब दो किलोमीटर का क्षेत्र वन विभाग का है। वन विभाग ने इस क्षेत्र में खंभे लगाने के लिए एनओसी लेने की बात कही। सिंचाई विभाग ने एनओसी के लिए आवेदन कर दिया, लेकिन छह माह बाद भी एनओसी जारी नहीं हुई। जबकि, शहजाद स्प्रिंकलर परियोजना का कार्य करीब-करीब पूरा हो चुका है और यह चालू होने की कगार पर है।

फैक्ट फाइल

– एक पंप हाउस

– एक सब स्टेशन

– 984 खंभे लगेंगे

– 39 किमी. लंबी लाइन

– 1014 हेक्टेयर भूमि होगी सिंचित

कॉफर डैम को हटाने के लिए बांध हुआ था पूरा खाली

स्प्रिंकलर सिंचाई परियोजना के लिए शहजाद बांध के भराव क्षेत्र में मिट्टी का कॉफर डैम बनाया गया था। परियोजना का कार्य अंतिम चरण में पहुंच जाने पर वर्ष 2023 में मई-जून में कॉफर डैम को हटाने के लिए बांध खाली किया गया था। इसके जलस्तर को 310 मीटर तक पहुंचाया गया था। बांध का पानी न्यूनतम स्तर तक पहुंचने से बांध निर्माण के दौरान डूबे मंदिर और गांव के अवशेष दिखने लगे थे। कॉफर डैम के हट जान के बाद मानसून सीजन में यह बांध पुन: भर गया था।

परियोजना के संचालन के लिए यहां एक सबस्टेशन बनाया गया है। इसके लिए बिछाई जा रही लाइन के क्षेत्र में करीब दो किलोमीटर वन विभाग की भूमि है। वन विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र लेने की प्रक्रिया चल रही है। इसके बाद ही शेष लाइन का काम पूरा हो पाएगा और सिंचाई परियोजना का लाभ किसानों को मिलने लगेगा।

इंजी. शीलचंद्र उपाध्याय, अधीक्षण अभियंता, सिंचाई निर्माण मंडल झांसी



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *