बांदा। केन बेतवा लिंक परियोजना के लिए अधिग्रहित किए गये बुंदेलखंड के डुबान क्षेत्र के ग्रामीणों को जमीन का मुुआवजा और पुनर्वास के लिए अभी तक जमीन नहीं मिली है। इससे सैकड़ों ग्रामीणों का धैर्य टूट गया। इसके चलते छतरपुर कलेक्ट्रेट के सामने सैकड़ों महिला पुरुष धरना पर बैठ गए। धरना स्थल पर उन्होंने अपनी चिताएं सजा ली हैं। इसी बीच बुधवार को आधी रात के बाद मध्य प्रदेश पुलिस ने धरना दे रहे ग्रामीणों पर लाठी चार्ज कर दी। इसमें करीब 10 लोग घायल हो गए। आंदोलन के अगुवा अमित भठनागर समेत कई लोगों को अस्पताल में भर्ती कराए गए हैं।
आंदोलनकारी ग्रामीणों का कहना है कि कई साल बीत जाने के बाद भी उन्हें केन-बेतवा लिंक के लिए दी गई भूमि का मुआवजा नहीं मिला है, न ही अभी तक पुनर्वास के लिए कहीं जमीन दी गई है। सरकार ने मामले में पूरी तरह से चुप्पी साध रखी है। आंदोलन के अगुवा व स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता अमित भठनागर, पूर्व जीडीसी मुन्नीलाल खैरवार ने बताया कि सरकार ने उनकी जमीन और घर तो ले लिया, लेकिन अभी तक हम लोगों से बातचीत तक नहीं की है। उन्हें यह तक नहीं बताया जा रहा है कि कहां बसाया जाएगा।
सरकार के इस रवैये से नाराज लगभग एक दर्जन गांवों के ग्रामीणों ने कलक्ट्रेट के सामने धरना शुरू कर दिया है। बुधवार को अनशन स्थल पर चिताएं सजा दी गईं। आंदोलनकारियों के उग्र तेवर देखकर रात लगभग एक बजे पुलिस ने अनशनकारियों पर लाठी चार्ज कर दी। स्थिति तनाव पूर्ण होने के बाद छतरपुर जनपद के विधायक राजेश शुक्ला व राजेश प्रजापति और प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर ग्रामीणों को शांत किया। अमित भटनागर ने कहा कि अब चिता पर लेटकर आखिरी दम तक आमरण अनशन किया जाएगा। हालांकि छतरपुर पुलिस अफसरों ने लाठी चार्ज की बात से इन्कार किया है।
