चित्रकूट। शहर के पुरानी बाजार स्थित मराठा कालीन भवन के परिसर में बने 23 से अधिक घरों में शनिवार को बुलडोजर चलाया गया। इस कार्रवाई के शुरु होते ही इन घरों में रहने वालों ने घर गिराए जाने का विरोध किया। इसे लेकर अधिकारियों से कई बार नोकझोंक भी हुई लेकिन बुलडोजर चलता रहा। शाम को पीड़ित परिजन गिराए गए घरों के बीच पड़ी गृहस्थी बटोरने में लगे रहे। कई परिवार की महिलाएं आशियाना उजडने पर रोती बिलखती रहंी।
शहर के पुरानी बाजार मराठा कालीन भवन बना हुआ है। जिसके परिसर के अंदर कई परिवार अपना -अपना घर बनाकर कई साल रहते हैं। इसको पुरानी कोतवाली परिसर भी कहा जाता है। रविवार को एसडीएम सदर राजबहादुर, सीओ सदर हर्ष पांडेय व ईओ लालजी यादव के नेतृत्व में पुलिस फोर्स सुबह 10 बजे पहुंची। जहां पर बुलडोजर से घर गिराने का कार्य शुरू किया गया। इससे हडक़ंप मच गया। यहां रहने वाले पहले इस कार्रवाई पर विरोध जताया। जिसमें कहा गया कि मामला कोर्ट में चल रहा है। दूसरा आशियाना न होने से सब बेघर हो गए। इस मामले को लेकर कई बार नोकझोक भी हुई। इसके बाद भी अधिकारी नहीं माने ।एक तरफ से बनाए गए घर गिराने लगे। जिसमें घरों की पक्की दिवारों को बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया गया। बने टीन टप्पर भी हटा दिए गए। इस कार्रवाई के बाद टूटे पड़े घर के बीच पड़ी सामग्री को उठाने के कार्य में लग गई।
न्यायालय में मामला विचाराधीन, फिर भी कार्रवाई
श्याम सुंदर, प्रदीप, अलख निरंजन, दिनेश कुमार, लखन रावत, रामकृष्ण सिंह, गोपी कृष्ण, कलावती, हरिनाथ सिंह, रामदेव, राकेश कुमार, रामदुलारी, निरंजन कुमार, वीरेंद्र प्रताप सिंह, अलख निरंजन मिश्र, बृजमोहन सिंह, पुष्पेंद्र सिंह, धर्मेंद्र कुमार के घर गिराए गए हैं। इन्होंंने बताया कि लगभग 60 वर्ष से परिवार के सदस्यों के साथ निवास करते हैं। जिला प्रशासन ने अचानक बुलडोजर लेकर पहुंच गए। जो घरों गिरा दिये। जबकि मामला न्यायालय में चल रहा है।
नोटिस देने के बाद की गई कार्रवाई
चित्रकूट। एसडीएम राजबहादुर ने बताया कि अवैध तरीके से सरकारी भूमि में घर बने है। जिनको खाली कराने के लिए नोटिस भी दिया था। कई बार मौके पर जाकर घर खाली करने के लिए कहा गया। डिग्गी पिटवाकर भी चेतावनी दी गई।इसके बाद भी नहीं खाली किया। जिससे रविवार को यह कार्रवाई की गई है।
