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सामुदायिक विकास भवन का ताला नहीं खुलने से भीषण गर्मी में भटकते रहे दिव्यांग

दोपहर 12 बजे बताया गया-ब्लॉक कार्यालय में लगा है शिविर, कई लौटे

अमर उजाला ब्यूरो

ललितपुर।बार ब्लॉक मुख्यालय पर बुधवार को आयोजित दिव्यांग शिविर अव्यवस्थाओं की भेंट चढ़ गया। यहां बड़ी संख्या में दिव्यांग भटकते नजर आए। अव्यवस्थाओं के चलते दिव्यांगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। दोपहर करीब 12 बजे के बाद ब्लॉक कार्यालय में दिव्यांगों को बुलाकर 59 लाभार्थियों को चिह्नित किया गया, जिन्हें बाद में उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे।

बुधवार को कस्बे के सामुदायिक विकास भवन में पहले से निर्धारित दिव्यांग शिविर में शामिल होने के लिए सुबह नौ बजे से कई दिव्यांग सामुदायिक विकास भवन पहुंचकर सभागार के बाहर इंतजार करते रहे, लेकिन दोपहर 12 बजे तक सभागार का ताला नहीं खुला, जिससे दिव्यांग बाहर ही चिलचिलाती धूप में इधर-उधर भटकते रहे।

भीषण गर्मी में जिम्मेदारों द्वारा पूर्व निर्धारित कार्यक्रम में लोगों के लिए पानी व बैठने तक की व्यवस्था नहीं की गई थी। भवन का ताला नहीं खुलने के कारण कई दिव्यांग मायूस होकर लौट गए। दोपहर 12 बजे के बाद लोगों को सूचना दी गई कि शिविर सामुदायिक विकास भवन की जगह विकास खंड कार्यालय में आयोजित किया जा रहा है। जिससे कैंप में सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों से आए दिव्यांग परेशान हो गए। लोगों ने कहा कि शिविर का स्थान बदलने की सूचना पहले से दी जानी चाहिए। लोगों ने कहा कि कड़ी धूप में एक परिसर से दूसरे परिसर में जाने के लिए लोग परेशान होते रहे, सबसे ज्यादा दिक्कत बुजुर्गों को हुई।

25 किमी दूर से आकर सुबह नौ बजे से इंतजार कर रहे थे। दिव्यांगों के लिए कोई सुविधा नहीं की गई है। पेयजल की कोई व्यवस्था की गई। -सविता देवी

तेज धूप में दो घंटे से बैठकर इंतजार करते रहे। जगह बदलने की कोई भी जानकारी पहले से नहीं दी गई। लोग परेशान होते रहे। कल्याण सिंह

भवन का ताला नहीं खुलने से तेज धूप में बाहर ही घंटों से बैठकर इंतजार करते रहे। ताला नहीं खुलने से कई लोग तो घर लौट गए।-रामप्रसाद

शिविर में शामिल होने के लिए काफी दूर से परिजनों के साथ आए हैं, घंटों से धूप में बैठकर इंतजार कर रहे हैं। लेकिन, अधिकारी सुध लेने नहीं आए। मुन्ना राजा

इस मामले में बार के खंड विकास अधिकारी आलोक सिंह ने बताया कि सामुदायिक विकास भवन से ब्लॉक मुख्यालय की दूरी अधिक नहीं है यदि कोई दिक्कत थी तो दिव्यांगों के साथ आए परिजनों को वहां जाकर पता लगा लेना चाहिए था। व्यवस्था में किस स्तर पर लापरवाही रही इसकी जानकारी ली जाएगी।



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