माफिया की तलाश में वन विभाग टीम दो दिन से क्षेत्र में डाले है डेरा
बेशकीमती सागौन की लकड़ी कटान कर देवगढ़ से एमपी ले जाई जा रही
संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। देवगढ़ वन क्षेत्र में अवैध कटान के पीछे बगाड़िया जनजाति के लोगों का हाथ होने की आशंका जताई जा रही है। विगत दिवस धौर्रा वन क्षेत्र में अवैध कटान कर ले जाने वाली सागौन की बेशकीमती लकड़ी वन विभाग ने पकड़ी थी। यह लकड़ी देवगढ़ के जंगलों से मध्य प्रदेश ले जाई जा रही थी।
देवगढ़ वन क्षेत्र मध्य प्रदेश की सीमाओं से लगा हुआ है, इस जंगल में बेशकीमती शीशम व सागौन की लकड़ी के पेड़ खड़े हुए हैं। बाजार में अधिक मांग के कारण इसकी कीमत बढ़ी हुई है। देवगढ़ वन क्षेत्र में कुछ दिनों से जंगल में अवैध कटान चल रहा था। वन रक्षकों को सुबह पेड़ों के अवशेष मिल रहे थे। लेकिन, लकड़ी कहां जा रही है, इसकी खबर नहीं लग रही थी।
जब वन क्षेत्राधिकारी ललितपुर भोला सिंह ने जंगल में तैनात वनकर्मियों को सूचना तंत्र मजबूत कर अवैध कटान करने वालों को गिरफ्तार करने के निर्देश दिए तो शुक्रवार की रात को मुखबिर से सूचना प्राप्त हुई, कि देवगढ़ वन क्षेत्र में कुछ लोग बैलगाड़ी पर सागौन की बेशकीमती लकड़ी ले जा रहे हैं।
वन क्षेत्राधिकारी ने अपनी पूरी टीम के सहित छापा मारा तो अवैध कटान करने वाले वन विभाग की टीम पर हावी हो गए। ऐसे में वन विभाग के अधिकारियों ने फायरिंग कर उन्हें रोका, गोलियों की आवाज सुनकर कटान करने वाले सभी लोग वन क्षेत्र से भाग खड़े हुए। जिसके बाद मौके पर बैलगाड़ी पर लदीं सागौन की 78 बल्लियां बरामद की गईं।
वन विभाग की जांच में पाया गया कि अवैध कटान करके यह लकड़ी मुंगावली व सहराई क्षेत्र में ले जाती रही थी। इस कार्य में बगाड़िया जनजाति के लोग शामिल हैं, जो इन गांवों के आसपास मजरों में निवास करते हैं। वन विभाग की टीम इन लोगों पर नजर रख रही है। माफिया की तलाश में वन विभाग टीम दो दिन से क्षेत्र में डेरा डाले है।
तस्करों के लिए बेतवा का पुल सहायक
वर्तमान में बेतवा नदी पर मध्य प्रदेश को जोड़ने वाला पुल तैयार हो चुका है, इस पुल से ही वन क्षेत्र से लकड़ी, अन्य वन संपदा और जड़ी बूटी आदि की तस्करी होती रहती है। पुल से आसानी लोग मध्य प्रदेश में चले जाते हैं, जहां पर वह लोग जंगलों से निकलकर अपने स्थानों पर सुरक्षित निकल जाते हैं।
तेंदुए के खौफ का राज जानने में जुटी वन विभाग की टीम
देवगढ़ वन क्षेत्र में जंगली जानवर तो विचरण करते ही रहते हैं, लेकिन हाल ही में तेंदुआ द्वारा पालतू पशुओं के शिकार की खबर फैलाई जा रही थी। इसे लेकर वन विभाग ने वन क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों के मार्गों पर गश्त बढ़ाई, लेकिन उन्हें तेंदुए के पद चिह्न दिखाई नहीं दिए। उधर, हर रोज ग्रामीणों में तेंदुए की एक कहानी वायरल की जा रही थी। चर्चा है कि कहीं इसके पीछे अवैध कटान माफिया तो शामिल नहीं हैं। वन विभाग की टीम इस बिंदु पर भी जांच कर रही है।
ललितपुर वन क्षेत्राधिकारी भोला सिंह ने बताया कि देवगढ़ वन क्षेत्र में अवैध कटान के पीछे बगाड़िया जनजाति के लोगों का हाथ सामने आ रहा है। इसके पीछे माफिया कौन हैं, उनकी तलाश की जा रही है।
