विकास और ऊषा के बीच एकसाल से प्रेम प्रसंग चल रहा था। इसकी जानकारी उनके घरवालों को भी थी। स्थानीय ग्रामीणों के मुताबिक नेढुवा गांव निवासी मृतक विकास राजपूत मुंबई में रहकर कमाता था। मार्च महीने में फसल काटने के उद्देश्य से वह अपने पिता गुलाब राजपूत के साथ मुंबई से गांव आया था। तब से यह यहीं था।
उसका पड़ोस में रहने वाली मृतका ऊषा राजपूत से लगभग एक साल से प्रेम प्रसंग चल रहा था। मंगलवार को विकास के माता-पिता एक निमंत्रण में गए थे। बताया जाता है कि मृतका ऊषा के माता-पिता भी निमंत्रण में गए थे। मंगलवार को दोपहर करीब 12 बजे दोनों अपने-अपने घर से साथ में चले गए थे।
लकड़ी बांधने के नाम पर खरीदी थी रस्सी
ग्रामीणों ने बताया कि विकास ने मंगलवार को दोपहर बड़ैछा गांव में एक दुकानदार के यहां से लकड़ी बांधने के नाम पर रस्सी भी खरीदी थी। उधर, देर शाम जब दोनों के परिजन घर आए, तो वह घरों से नदारद थे। परिजन ने चुपचाप दोनों की खोजबीन भी की, लेकिन वह नहीं मिले।
डाई घुली हुई मिली बोतल
बुधवार को दोपहर एक बजे के करीब चरवाहों ने जंगल में उनके शव लटके देखे तो परिजनों और पुलिस को खबर दी। नरैनी इंस्पेक्टर अरविंद सिंह गौर घटना स्थल पहुंचे। उन्होंने बताया कि घटनास्थल में बालों में लगाने वाली डाई की तीन पुड़िया, आधा लीटर की दो पेप्सी की बोतल में से एक बोतल में डाई घुली हुई मिली है।
प्रेम प्रसंग के खिलाफ थे परिजन
एक बोतल में पानी भरा मिला। मृतकों के मोबाइल फोन भी मिले हैं। इनकी कॉल डिटेल निकाली जा रही है। शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। एक बिरादरी, फिर भी थे शादी के खिलाफ थे परिजन पारिवारिक सूत्रों और ग्रामीणों के हवाले से बताया गया है कि परिजनों को इनके प्रेम प्रसंग की जानकारी थी।
फिर दोनों ने उठा लिया आत्मघाती कदम
एक बिरादरी के होने के बावजूद दोनों के परिजन शादी के लिए राजी नहीं थे। शायद इसलिए उन्होंने यह आत्मघाती कदम उठा लिया। मृतक विकास दो भाई एक बहन में बड़ा था। बहन की शादी शुदा है। पिता गुलाब राजपूत गांव में खेती किसानी के साथ-साथ मुंबई में रहकर कमाते हैं। उधर, मृतक ऊषा आठ बहनों में पांचवें नंबर की थी।
