बांदा। मार्च 1994 में दस्यु सरगना ददुआ यहां के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक विजय कुमार की गोली का शिकार होने से बाल-बाल बच गया था। जान बचाकर भागा गिरोह पहाड़ पर चढ़ गया और पुलिस फोर्स पर फायरिंग शुरू कर दी थी। इसमें कर्वी (चित्रकूट) के तत्कालीन सीओ राजवीर कमर में गोली लगने से घायल हो गए थे। एसपी विजय कुमार ने खुद मोर्चा संभाल कर ददुआ गिरोह पर निशाना साधा, लेकिन पहाड़ आड़े आ गया, इससे वह बच गया था। तत्कालीन एसपी अब प्रदेश के कार्यवाहक डीजीपी बने तो पुरानी यादें ताजा हो गईं।
उन दिनों चित्रकूट अलग जिला न होकर बांदा में ही शामिल था। ददुआ का आतंक पाठा क्षेत्र में ज्यादा था। 1994 में बांदा के विजय कुमार एसपी बनकर आए। ददुआ और उसके गिरोह की खबर मिलने पर वह बहलपुरवा और मानिकपुर के बीच घने जंगल में स्थित कुुएं के ईदगिर्द डट गए। पुलिस को सूचना मिली थी कि ददुआ गिरोह कुएं में पानी पीने आ रहा है। दोपहर लगभग तीन बजे का समय था। एसपी विजय कुमार ने ग्रामीण वेशभूषा सफेद कुर्ता व पायजामा पहन रखा था। इन्हीं कपड़ों में उन्होंने एके 47 राइफल और पिस्टल छिपा रखी थी। साथ में उनका पुलिस गनर इकबाल अहमद भी सादी वर्दी में असलहों से लैस था। ददुआ गिरोह पहाड़ से उतरकर कुएं की तरफ बढ़ा ही था, इसी दौरान क्षेत्राधिकारी ने कुछ जल्दबाजी करते हुए गिरोह पर फायरिंग शुरू कर दी।
गिरोह के सदस्य भागकर पहाड़ पर चढ़ गए और पुलिस पर गोलियां बरसानी शुरू कर दी। खुद मोर्चा संभाले एसपी विजय कुमार गिरोह को अपने निशाने पर लिए थे। डकैतों की एक गोली सीओ की कमर में जा लगी। इसके बाद गिरोह पहाड़ों के घने जंगल में ओझल हो गया। यह मुठभेड़ काफी चर्चित रही थी। ददुआ को पहली बार पुलिस से इतनी बड़ी चुनौती मिली थी। विजय कुमार की कप्तानी और नेतृत्व में ही उस जमाने के एक और खतरनाक डकैत नत्थू यादव गैंग से भी कमासिन (बांदा) थाना क्षेत्र के जगऊ टोला गांव में भी पुलिस से मुठभेड़ हुई थी।
इसमें गिरोह का एक सदस्य पुलिस के हाथों मारा गया था। उनके तत्कालीन गनर रहे इकबाल अहमद का कहना है कि पुलिस कप्तान के रूप में विजय कुमार ने हमेशा खुद आगे बढ़कर नेतृत्व किया और जवानों का हौसला बढ़ाया।
