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बांदा। रेडियोलॉजिस्ट न होने जिला महिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड की सुविधा नहीं मिल पा रही है। इससे जांच के लिए गर्भवती महिलाओं को परेशान होना पड़ रहा है। ऐसे में मरीजों को निजी पैथालॉजी में अल्ट्रासाउंड के लिए 700 रुपये जेब से देने पड़ रहे हैं।

जिला महिला अस्पताल में चार वर्षों से रेडियोलॉजिस्ट न होने के कारण स्टोर रूम में रखी अल्ट्रासाउंड मशीन धूल फांक रही है। यहां प्रतिदिन करीब 400 मरीजों की ओपीडी की जाती है। इसमें ज्यादातर गर्भवती महिलाएं होती हैं।

उन्हें तीन से चार बार अल्ट्रासाउंड की आवश्यकता पड़ती है। सभी को बाहर से अल्ट्रासाउंड करवाना पड़ता है। कभी-कभी प्रसव के दौरान महिला को बाहर अल्ट्रासाउंड करवाने ले जाना कष्टकारी हो जाता है। यहां ज्यादातर महिला चिकित्सक बाहर से अल्ट्रासाउंड करवाने की सलाह देती हैं।

– करहिया निवासी रोली का कहना है कि यहां पर सुविधा नहीं होने से निजी पैथालॉजी में तीन बार अल्ट्रासाउंड करवा चुकी हैं। हर बार सात 700 रुपये खर्च कर अल्ट्रासाउंड बाहर से करवाना पड़ा हैै।

-कटरा निवासी दुर्गा गुप्ता का कहना है कि पुरुष अस्पताल में अल्ट्रासाउंड के लिए गई, लेकिन वहां पर भीड़ के कारण मजबूरी में बाहर से करवाना पड़ा। शिकायत पर कोई सुनवाई भी नहीं हो रही है।

जिला महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. सुनीता सिंह का कहना है कि रेडियोलॉजिस्ट की आवश्यकता है। उच्चाधिकारियों को कई बार पत्राचार किया है, लेकिन अभी तक तैनाती नहीं हुई है। इसके चलते फिलहाल मरीजों को पुरुष अस्पताल में अल्ट्रासाउंड कराने के लिए भेजा जाता है। वहां भीड़ के चलते मरीज बाहर से अल्ट्रासाउंड करवाते हैं।



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