चित्रकूट। अंधविश्वास में जकड़े एक शख्स ने अपने मासूम बच्चों व पत्नी को लगभग चार साल तक घर में कैद रखा। तंत्र मंत्र कर सिद्धि पाने की ख्वाहिश में परिवार बीमार पड़ गया। शख्स जब बाहर निकलता तो दरवाजे पर ताला लगा देता था। रिश्तेदारों की सूचना पर पहुंची पुलिस व चाइल्ड लाइन की टीम ने सभी को निकालकर जिला अस्पताल में भर्ती कराया। प्राथमिक इलाज के बाद सभी को प्रयागराज रेफर किया गया है।
मामला शहर के तरौंहा के दुर्गाकुंज निवासी काशी केसरवानी के परिवार का है। गुरुवार की रात को कोतवाली पुलिस टीम व चाइल्ड लाइन की टीम ने अचानक पहुंचकर घर का दरवाजा खटखटाया। किसी ने अंदर से दरवाजा नहीं खोला तो टीम के सदस्य दरवाजे को तोड़कर अंदर घुसे। अंदर का नजारा देख सभी अचंभित रह गए। गृहस्वामी काशी, उसकी पत्नी पूनम, पुत्र रजत (13) व पुत्री असिता (14) डरे सहमे घर के एक कमरे में एक कोने में बैठे थे। चाइल्ड लाइन टीम के सदस्य विशेष त्रिपाठी ने बताया कि सभी के चेहरे व हाथ पैर पीले पड़े थे। बेहद बीमार लग रहे थे। घर में तंत्र मंत्र व पूजन सामग्री इधर उधर रखी थी। पुलिस ने चारों सदस्यों को पुलिस वाहन से जिला अस्पताल पहुंचाया। शुक्रवार की सुबह डॉक्टरों ने चारों को प्रयागराज रेफर कर दिया है।
कोतवाली के एसआई प्रवीण सिंह ने बताया कि काशी के रिश्तेदारों ने यह सूचना दी थी कि घर के सदस्यों को कैदी की तरह रखा गया है। खिड़की व छत पर जाने के रास्ते पूरी तरह बंद किए गए हैं। घर से बाहर किसी को नहीं जाने दिया जाता। आसपास के लोगों से पुलिस ने जानकारी जुटाई तो पता चला कि लगभग चार साल से किसी ने घर के बाहर किसी सदस्य को नहीं देखा। सिर्फ काशी एक या दो बार घर से निकलता है। जब निकलता है तो घर के दरवाजे पर ताला लगाकर जाता है।
जब एंबुलेंस में घर के सदस्यों को बैठाया गया तो उन्हें देखने के लिए लोगों की भीड़ वहां जमा हो गई। सभी ने काशी के इस व्यवहार पर आक्रोश जताया। लोगों ने बताया कि काशी किराना व्यापारी था। लगभग चार साल पहले ही यह नया घर बनवाया था। इस नए घर में जब से यह परिवार रहने लगा, तब से तंत्र मंत्र का क्रम शुरू हुआ। सिद्धि पाने के चक्कर में काशी ने पत्नी व दोनों बच्चों को घर में कैद कर दिया।
इलाज करने वाले डॉ. अब्दुल्ला ने बताया कि सभी सदस्य शारीरिक रूप से बेहद कमजोर हो गए थे। उनकी मानसिक स्थिति भी सामान्य नहीं थी। यह सब शायद एक घर के अंदर चार साल से रहने के कारण ही हुआ है।
