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प्रभारी सीवीओ के रिश्वत लेने का मामला, इन वीडियो में कई सफेदपोशों का जिक्र

संवाद न्यूज एजेंसी

ललितपुर। रिश्वत मामले में प्रभारी सीवीओ के हटाए जाने के बाद जांच की रस्म अदायगी शुरू हो गई है। इस बीच मामले से जुड़े दो और वीडियो की भी चर्चा जोरों पर है। माना जा रहा है कि इन वीडियो में गोमाता के भोजन में रिश्वत की हिस्सेदारी का जिक्र है। अगर ये वीडियो सामने आ गए तो कई सफेदपोशों का फंसना तय है। इसको लेकर प्रशासनिक अमले में खलबली मची है।

वहीं, अमझरा घाटी गोवंश आश्रय स्थल को लेकर 17 मई को प्रभारी मुख्य पशुचिकित्सा अधिकारी डॉ. एसके पांडेय की रिपोर्ट में यहां 7130 गोवंशों की रिपोर्ट की भेजी गई थी। इसके बाद 24 मई को उन्होंने अपनी निरीक्षण आख्या में गोवंश की संख्या 5,551 बताई। दूसरी रिपोर्ट प्रशासनिक अधिकारियों की निरीक्षण आख्या के दौरान बनाई गई थी, अब इस प्रकरण को भी रिश्वत लेने वाले वायरल वीडियो जोड़ा जा रहा है।

प्रभारी मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी द्वारा सेवानिवृत्त कर्मचारी से काम लेने की बात भी अब सतह पर आने लगी है। गो आश्रय केंद्रों में खाने की डाइट 50 रुपये प्रति गोवंश निर्धारित है। इसमें 30 रुपये का भूसा जोकि 3-4 किलोग्राम प्रति गोवंश के हिसाब से दिया जाता है। इसके साथ 20 रुपये में गुड, चना, नमक और दाना शामिल रहता है। वहीं, दाने के स्थान पर कभी कभार हरा चारा गोवंशों को उपलब्ध कराया जाता है। लेकिन, भूसा ठेकेदार द्वारा कम भूसा गोआश्रय स्थल तक पहुंचाया जाता है।

यह भूसा एक से दो किलोग्राम प्रति गोवंश के हिसाब से होता है। हालांकि जिम्मेदार अधिकारी इसे नकार रहे हैं। वहीं, गोवंशों के भूसा टेंडर के नाम पर रिश्वत लेने का वीडियो वायरल होने के बाद विश्व हिंदू परिषद ने जिलाधिकारी से मुलाकात करते हुए इस मामले की निष्पक्ष जांच करने की मांग की है।

गेहूं के भूसे की जगह सप्लाई किया जाता है चना-मटर का डंठल वाला भूसा

गो आश्रय केंद्र खुलने के बाद शासन द्वारा यहां संरक्षित किए जाने वाले गोवंशों की देखरेख के लिए भूसे और चोकर सहित अन्य व्यवस्थाओं के लिए धनराशि आवंटित की जाती है। टेंडर पाने वाली कंपनी के ठेकेदारों को गेहूं का भूसा सप्लाई करना होता है। वहीं, विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से मटर-चना, मूंग-उड़द आदि का डंठल वाला भूसा गोआश्रय केंद्रों में सप्लाई हो रहा है। इसकी शिकायत आए दिन ग्रामीण क्षेत्रों से जिला प्रशासन तक आती रहती हैं। लेकिन, ठेकेदार पर कोई ठोस कार्रवाई कभी नहीं की गई।

गोवंश आश्रय स्थलों पर चल रहा पशु टैग का खेल

जनपद में 52 गोवंश आश्रय स्थल हैं, जिनमें जिला पंचायत द्वारा संचालित 22 कांजी हाउस व तीन नगर पंचायतों द्वारा संचालित गोवंश आश्रय स्थल हैं। बाकी 27 गोवंश आश्रय स्थलों का संचालन पशु विभाग द्वारा किया जा रहा है। विभागीय आंकड़ों की मानें तो इन गोवंश आश्रय स्थल पर 31 हजार 299 गोवंश हैं, जिनके भूसे व इलाज का इंतजाम विभाग द्वारा किया जाता है। जनपद में यह टैग संख्या कम नहीं हुई है, जबकि गोवंश आश्रय स्थलों पर कई पशुओं का निधन हो जाता है, लेकिन उनके टैग सरेंडर नहीं किए जाते हैं।



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