ग्वालियर-बरौनी मेल में रहती है गंदगी, वॉशबेसिन का नल टूटा पड़ा, शौचालयों से आती है बदबू
– शाम को ग्वालियर पहुंचने के बाद अगले दिन दोपहर में बरौनी के लिए रवाना होती है ट्रेन
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। रेलवे यात्रियों को सुरक्षित और सुविधाजनक सफर कराने के दावे कर रहा है। ट्रेनों की सफाई को लेकर रेलवे बड़ा बजट खर्च कर रहा है, लेकिन सफाई के नाम पर महज खानापूर्ति की जा रही हैै। मंगलवार शाम को बरौनी से ग्वालियर पहुंची ट्रेन की 17 घंटे बाद भी सफाई नहीं हुई। बुधवार दोपहर को जब यह ट्रेन ग्वालियर से बरौनी के लिए रवाना हुई, तो ट्रेन में जगह-जगह कूड़ा पड़ा था। वॉशबेसिन का नल टूटा पड़ा था। अमर उजाला टीम ने बुधवार को झांसी रेलवे स्टेशन पर साधारण ट्रेन ग्वालियर-बरौनी मेल की पड़ताल की। ट्रेन में रेलवे की बदइंतजामी हावी थी, जिनसे यात्री जूझ रहे थे। यात्री कई बार इसकी शिकायत भी कर चुके हैं।
ग्वालियर-बरौनी के लिए प्रतिदिन अप और डाउन रूट पर एक्सप्रेस ट्रेन चलती है। बिहार की ओर जाने वाली इस ट्रेन से बुंदेलखंड से बड़ी संख्या में सफर करते हैं। ट्रेन बरौनी से शाम 6.45 बजे चलकर अगले दिन शाम सात बजे ग्वालियर पहुंचती है। इसके अगले दिन दोपहर 12 बजे यह ट्रेन ग्वालियर से बरौनी के लिए रवाना होती है। ग्वालियर में ट्रेन की सफाई के लिए रेलवे को शाम सात बजे से लेकर अगले दिन दोपहर 12 बजे तक 17 घंटे का वक्त मिलता है, लेकिन ट्रेन में सफाई को काेई नामोनिशान नहीं है।
बुधवार दोपहर दो बजे झांसी स्टेशन पहुंची ग्वालियर-बरौनी मेल में सफाई व्यवस्था शून्य नजर आई। गाड़ी पहले से ही खचाखच भरी हुई थी। जिससे झांसी की सवारियां ट्रेन के कोचों में दाखिल होने के लिए खासी जद्दोजहद करती नजर आईं। जनरल कोचों में जगह न मिलने पर सवारियों ने स्लीपर कोचों की ओर रुख किया। दो-तीन मिनट के भीतर स्लीपर कोच भी ठसाठस भर गए। आरक्षित सीटों पर भी यात्री सवार हो गए थे। शौचालय गंदे पड़े हुए थे, जिनकी दुर्गंध कोचों तक आ रही थी। एस-5 कोच के वॉशबेसिन का नल टूटा हुआ था। इससे पानी का फव्वारा फूट रहा था। जो कोच में दाखिल होने वाले यात्रियों को गीला कर रहा था। ट्रेन के रवाना होने पर अनारक्षित कोचों में तमाम यात्री गेटों पर लटक कर यात्रा करते नजर आए।
प्रीमियम ट्रेनों चकाचक इंतजाम
साधारण ट्रेनों में गंदगी है, तो प्रीमियम ट्रेनों में सफाई चकाचक है। रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर सात पर खड़ी गतिमान एक्सप्रेस में सभी व्यवस्थाएं दुरुस्त पाई गईं। कोचों में गंदगी का नामोनिशान नहीं था, जबकि ट्रेन के शौचालय भी एकदम साफ थे। एसी अपनी रफ्तार पर चल रहे थे और कोच अटेंडेंट मुस्तैदी से अपनी ड्यूटी को अंजाम दे रहे थे। नलों में भरपूर पानी आ रहा था। ट्रेन के कोचों में जगह भी पर्याप्त थी। कोचों की लगभग आधी कुर्सियां खाली थीं। ट्रेने में सवार यात्री सुकून के साथ अपनी यात्रा शुरू होने का इंतजार कर रहे थे।
ट्रेनों के इंतजार में झेल रहे थे लू के थपेड़े
झांसी रेलवे स्टेशन पर वीआईपी लाउंज बना हुआ है, जो पूरी तरह से वातानुकूलित है। इसमें 20 रुपये प्रतिघंटा अदा करने पर आरामदायक सोफों पर बैठकर ट्रेनों का इंतजार किया जा सकता है। बुधवार की दोपहर लाउंज में 20-25 लोग बैठे हुए थे, जो सुकून से अपना समय काट रहे थे। जबकि, इसके ठीक बाहर प्लेटफार्म पर सवारियां लू के थपेड़ों के बीच ट्रेनों का इंतजार कर रहींं थीं। बेंच भरी होने से तमाम सवारियां जमीन पर ही बैठी हुईं थीं।
रेलवे की ओर से भी सभी ट्रेनों के रखरखाव पर नियमित रूप से ध्यान दिया जाता है। इसके अलावा यात्रियों की ओर से शिकायत आने पर तत्काल निस्तारण सुनिश्चित किया जाता है।
– मनोज कुमार सिंह, जनसंपर्क अधिकारी
