बांदा। एक सप्ताह बाद खुले अल्ट्रासाउंड कक्ष में शुक्रवार को मरीजों की भीड़ रही। यहां 60 मरीजों का किया अल्ट्रासाउंड किया गया। करीब 50 से ज्यादा मरीज बैरंग लौटने को मजबूर हुए।
महिला और पुरुष जिला अस्पताल के मरीजों के लिए मात्र एक अल्ट्रासाउंड व एक रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती है। तीन जून को रेडियोलॉजिस्ट के अवकाश में चले जाने पर जिला अस्पताल की अल्ट्रासाउंड सेवाएं ठप हो गई थीं। मरीजों को बाहर से 700 रुपये खर्च कर अल्ट्रा साउंड कराना पड़ रहा था।
रेडियोलॉजिस्ट के एक सप्ताह बाद अवकाश से लौटने पर शुक्रवार को अल्ट्रा साउंड कक्ष खुला तो अल्ट्रासाउंड करवाने वाले मरीजों की लाइन लग गई। इस बीच मौजूद कर्मचारी ने 60 पर्चे जमा करने के बाद शेष मरीजों को यह कह कर वापस लौटा दिया कि प्रतिदिन 60 अल्ट्रासाउंड ही किए जाते हैं, शेष कल आएं। ऐसे में सुबह आठ बजे से लाइन में लगे अल्ट्रा साउंड करवाने वाले करीब आधा सैकड़ा मरीजों को बैरंग लौटना पड़ा।
मटौंध निवासी गर्भवती रमाकांति ने बताया कि डॉक्टर ने अल्ट्रासाउंड के लिए लिखा था। सुबह से लाइन में लगी हैं। उन्हें कल आने के लिए कहकर वापस कर दिया गया है। जरैली कोठी निवासी माया ने बताया कि उन्हें डॉक्टर ने अल्ट्रा साउंड के लिए लिखा है, पिछली बार तीन जून को बाहर से करवाया पड़ा था, आज फिर बाहर से करवाना पड़ेगा।
आवास विकास निवासी कविता का कहना है कि सुबह से लाइन पर लगे थे। बाद में 60 पर्चे लेने के बाद सबको कल आने के लिए कह दिया। चंदवारा निवासी लक्ष्मी देवी का कहना है कि वह बेहद गरीब है, पेट की समस्या पर डॉक्टर ने अल्ट्रासाउंड लिखा था। लाइन में खड़े होने के बावजूद कह रहे हैं कल आना।
ज्यादा अल्ट्रासाउंड करने में फोटो क्वालिटी खराब आती है, इसलिए प्रतिदिन अल्ट्रासाउंड करने की क्षमता 50 ही है। हालांकि आज 60 अल्ट्रासाउंड किए गए हैं।
डॉ. एसएन मिश्रा,सीएमएस, जिला पुरुष अस्पताल, बांदा।
