बांदा। गिरवां थाना क्षेत्र के बड़ोखर बुजुर्ग गांव में चार लोगों की हत्या का पुलिस ने 56 दिन बाद शनिवार को खुलासा कर दिया। पुलिस का दावा है कि चारों हत्याएं मृतक किसान के समधी और उसके बड़े दामाद ने की थी। समधी को पुलिस ने गिरफ्तार किया है, जबकि बड़ा दामाद फरार है। हत्या की वजह मृतक किसान की बहू की ओर से जीजा से फोन पर बात करना व विवाद के बाद उसका मायके में रहना बताया जा रहा है। हत्या का चश्मदीद होने के कारण जिस नाती को आरोपी लेने पहुंचे थे उसे भी मौत के घाट उतार दिया था। पुलिस ने आलाकत्ल बाका और खून से सने आरोपियों के कपड़े भी बरामद कर लिए हैं।
घटनाक्रम का शनिवार को पुलिस लाइन सभागार में एसपी अभिनंदन ने खुलासा गया। बताया कि 15 अप्रैल को बुजुर्ग चुन्नू कुशवाहा (70), उसकी पत्नी कैलसिया (68), भाभी तेजनिया उर्फ ब्रजरानी (76) व पौत्र प्रांशु (9) की धारदार हथियार से हत्या कर दी गई थी। घटना के समय मृतक चुन्नू का एकलौता पुत्र बालेंद्र अपनी बहन शोभा के घर गया था।
एसपी ने बताया कि मृतक चुन्नू कुशवाहा के पुत्र बालेंद्र की शादी गिरवां थाना क्षेत्र के गयाप्रसाद का पुरवा निवासी रामबहोरी की पुत्री अनीता से 10 साल पहले हुई थी। दोनों का पुत्र प्रांशु (9) था। अनीता अपने बड़े बहनाई पहाड़ी, चित्रकूट निवासी गंगासागर से फोन पर बात करती थी। इससे बालेंद्र नाराज रहता था। दोनों में अक्सर कहासुनी होती थी। इससे नाराज होकर दो साल पहले अनीता मायके में रहने लगी थी। जबकि प्रांशु पिता बालेंद्र, बाबा चुन्नू, दादी कैलसिया व बड़ी दादी तेजनिया (विधवा) के साथ रहता था।
होली पर्व में बालेंद्र और गंगासागर के बीच कहासुनी भी हुई थी। इसी मनमुटाव को लेकर रामबहोरी ने बड़े दामाद गंगासागर के साथ मिलकर बालेंद्र के परिजनों की हत्या की साजिश रची थी। 15 अप्रैल को रामबहोरी बड़े दामाद के साथ उनके घर पहुंचा था। इसकी सूचना चुन्नू को भी दी थी। उन्होंने खाने का इंतजाम किया था। यहां प्रांशु को साथ ले जाने को लेकर उनका विवाद हुआ था।
इसी में पहले तीन लोगों की हत्या कर दी। इस दौरान चश्मदीद प्रांशु यह देखकर छत पर जाकर छुप गया था। हत्यारोपियों ने उसे भी मौत के घाट उतार दिया था। खुलासे में एसपी अभिनंदन के अलावा अपर एसपी लक्ष्मी निवास मिश्र, सीओ सदर अंबुजा त्रिवेदी रहे।
बांदा। एसपी अभिनंदन ने बताया कि हत्यारोपी मेहमान बनकर आए थे। मृतक चुन्नू ने उनके लिए रोटी पानी का भी इंतजाम किया था। रसोईघर में थाली, पानी, रोटी, दूध और टमाटर की सब्जी रखी मिली थी। यहां तेजनिया का शव पड़ा मिला था। जबकि कैलशिया का शव कमरे में पड़ा था। चूड़ी भी टूटी मिलीं थी। चुन्नू का शव आंगन में पड़ा था। मासूम प्रांशु का शव छत पर मिला था। हत्या को अंजाम देने के बाद आरोपियों ने कपड़े भी बदले थे। आलाकत्ल बांका घटनास्थल के पास ही सड़क किनारे छिपा दिया था। पुलिस ने आलाकत्ल और कपड़ों को बरामद किया है। घटना के समय मृतकों के घर के बगल में ट्यूबवेल का मोटर चलने पर चीखों की आवाजें दब गईं थीं। इसी से किसी को भी शक नहीं हुआ।
बांदा। इस हत्याकांड के खुलासे के लिए कई बार एसपी अभिनंदन खुद बड़ोखर बुजुर्ग गांव पहुंचे थे। खुलासे में नाकाम रहे तत्कालीन थानाध्यक्ष कुलदीप तिवारी को लाइन हाजिर किया था। एसपी ने बताया कि इस खुलासे के लिए इंस्पेक्टर संदीप तिवारी की तैनाती गिरवां थाने में की। उनके साथ एसआई दानबहादुर पाल, फील्ड यूनिट प्रभारी एसआई सतीश शुक्ला व कांस्टेबल सुरजीत ने मिलकर घटना का 56 दिन में अनावरण कर दिया।
–
