बांदा/ करतल। नरैनी ब्लॉक की ग्राम पंचायत रिंहुची के मजरा मनकी पुरवा के लोग रहते तो यूपी में हैं, लेकिन प्यास एमपी के पानी से बुझा रहे हैं। 300 की आबादी वाले मजरे में एक मात्र हैंडपंप है, जो गंदा व बदबूयुक्त पानी दे रहा है। ऐसे में ग्रामीण चार किलोमीटर का लंबा रास्ता तय करके एमपी के गावों से पीने का पानी लाते हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि आजादी के 75 साल में कई पार्टियों की सरकारें आईं और गईं, लेकिन गांव में पीने के स्वच्छ पानी की व्यवस्था किसी ने नहीं की। मजरे में एक हैंडपंप लगा है। जो गंदा, बदबूूूूदार पानी दे रहा है। इसके अलावा गांव में पीने के पानी का और कोई प्रबंध नहीं है। मजबूरी में लोगों को चार किलो मीटर पैदल चलकर एमपी के गांव मडरका से पानी लाना पड़ रहा है।
पशुओं को पानी पिलाने के लिए एमपी के बिलार नाले में जाते है। सुनीता का कहना है कि मजरे में पानी की भीषण समस्या है। एमपी के गांवों में पानी भरने जाते हैं तो लोग विरोध करते हैं। हालांकि प्रधान के समझाने पर लोग मान गए और अब एमपी के लोग उन्हें पानी देने में गर्व महसूस करते हैं और पहले उन्हें पानी भरने देते हैं बाद में खुद भरते हैं। ग्राम पंचायत सदस्य चंद्रभान का कहना है कि यूं तो गांव ढेरों समस्याओं से जूझ रहा है।
यहां पर बच्चों के पढ़ने के लिए न विद्यालय है और न आंगनबाड़ी केंद्र है। बच्चे पढ़ने के लिए करतल जाते हैं। गलियों का यह हाल है कि बारिश होने पर घुटनों से पानी भर जाता है। खंड विकास अधिकारी प्रमोद कुमार सिंह का कहना है कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है। सचिव से रिपोर्ट तलब की गई है। विकास कार्यों के साथ ही पानी की आपूर्ति टैंकरों से की जाएगी।
मटौध। कस्बे में जलसंस्थान की ओर से की जा रही पानी आपूर्ति 24 घंटे में महज सुबह के समय 30 मिनट तक ही होती है। ऐसे में लोगों को आवश्यकता का पानी कुआं अथवा हैंडपंपों से लाना पड़ता है। इचौली, नवातला बजरंगी सहित कस्बे एक दर्जन हैंडपंप खराब पड़े हैं। बाब, श्याम, बंसी कुआं सहित अधिकतर कुओं का जल स्तर नीचे चला गया है। कुओं में पानी की जगह कीचड़ है। ग्रामीण दो किलोमीटर दूर से पानी लाते हैं। चेयरमैन सुधीर सिंह का कहना है कि जल्द सर्वे कराकर हैंडपंपों को ठीक कराया जाएगा। कुओं का जीर्णोद्धार होगा।
