बांदा। जनपद की 71 मॉडल ग्राम पंचायतों में वित्तीय वर्ष समाप्त होने व चालू वित्तीय वर्ष के चार माह बीतने को हैं। लेकिन 26 से अधिक ग्राम पंचायतें विकास कार्यों का करीब 10 करोड़ रुपये खर्च नहीं कर सकी हैं। लिहाजा शासन में जनपद की किरकिरी होने पर सीडीओ ने प्रधान व सचिवों को नोटिस भेजकर तीन दिन में स्पष्टीकरण मांगा है। संतोषजनक जवाब न मिलने पर संबंधित प्रधान व सचिव के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।
जनपद में वर्ष 2021-22 में 71 ग्राम पंचायतों को मॉडल ग्राम पंचायत के रूप में विकसित करने के लिए चयनित किया गया था। ग्राम पंचायतों को विकास कार्यों के 72 करोड़ की धनराशि जारी की गई थी। लेकिन एक वर्ष चार माह बीतने को है। ग्राम पंचायतें शत प्रतिशत धनराशि खर्च करने में नाकाम साबित हुई हैं। मॉडल ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों का करीब 10 करोड़ से अधिक अभी भी बकाया है। शासन स्तर पर अपर मुख्य सचिव द्वारा की गई समीक्षा में जनपद की स्थिति बेहद खराब होने पर अफसरों को चेतावनी जारी की गई।
शासन की सख्ती के बाद मुख्य विकास अधिकारी ने ग्राम पंचायत तलहटी कालिंजर, सढ़ा, गुढ़ाकला, अतर्रा ग्रामीण, बदौसा, तुर्रा, बबेरू ग्रामीण, सिंधनकला, जसपुरा, इंगुवा, बीरा, मऊ, पछौहा, खुरहंड, बिलगांव, गिरवां, जमालपुर, मिर्जापुर, पतरहा, पनगरा, गौरा शिवपुर, बेंदा, मुगुंस, पपरेंदा, जौहरपुर में महज 40 से 41 फीसदी विकास कार्य होने पर प्रधान व सचिवों को नोटिस भेजकर तीन दिन में स्पष्टीकरण मांगा है। कहा कि विकास कार्यों में सिथिलता लापरवाही का सूचक है।
मॉडल ग्राम पंचायतों में प्रधान सचिव विकास कार्यों में रुचि नहीं ले रहे हैं। डीपीआरओ अजय आनंद सरोज ने विकास खंड नरैनी की ग्राम पंचायत परसहर, बरियारपुर, कुलसारी, लामा खुटला, महुई, तिंदवारी की ग्राम पंचायत कुरसेजा, कठसेमर, गुहरवां, साड़ी, जसपुरा की ग्राम पंचायत इछावर, गाजीपुर, गलौली, बड़ागांव, कानाखेडा में विकास कार्य शुरू न होने पर नाराजगी व्यक्त की गई। जिला पंचायत राज अधिकारी ने प्रधान व सचिवों को कारण बताओ नोटिस भेज कर तीन दिन में विकास कार्य शुरू कराने के निर्देश दिए हैं। चेतावनी दी है कि एक सप्ताह के अंदर मॉडल गांव विकास कार्य शुरू कर आवंटित धनराशि व्यय नहीं की गई तो अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
