बांदा। बुंदेलखंड के 41 बांधों में से 22 बांध डेड स्टोर में पहुंच गए हैं। इनमें बचा खुचा पानी भी धीरे-धीरे नीचे खिसकता जा रहा है। यही हाल रहा था तो किसानों को खरीफ की फसल के लिए पानी नहीं मिलेगा। अधिकारियों को बांध भरने के लिए बारिश का इंतजार है। बांधों के सभी फाटक बंद कर दिए गए हैं। यदि बारिश हुई तो रोस्टर के अनुसार खरीफ के लिए तीन जुलाई से नहरें चलेंगी।
चित्रकूटधाम मंडल में खरीफ सीजन में प्रति वर्ष औसतन 185480 हेक्टेयर फसलों की नहरों से सिंचाई होती है। खरीफ सीजन के लिए तीन जुलाई से नहरों में पानी छोड़ने का रोस्टर है, लेकिन इस बार बांधों में पानी न होने से नहरें चलने के आसार नहीं दिख रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि झांसी मंडल के 26 बांधों में से 12 और चित्रकूटधाम मंडल के 15 बांधों में सात डेड स्टोर पहुंच गए हैं। बांधों का बचा खुचा पानी भी गर्मी से सूख रहा है।
अभियंताओं का कहना है कि तालाब, पोखर और गड्ढों को भरने के लिए नहरों में पानी छोड़ा गया था, इससे पानी काफी खर्च हो गया। यदि मानसूनी बारिश अच्छी नहीं हुई तो खरीफ सीजन में किसानों को पानी नहीं मिल पाएगा। हालांकि बांधों को भरने के लिए सभी गेट बंद कर दिए गए हैं। अब बारिश का इंतजार है।
इनसेट-
चित्रकूटधाम मंडल के बांधों में पानी की स्थिति (मि.घ.मी में)
बांध क्षमता उपलब्ध पानी
गंगऊ (छतरपुर) 56.46 डेड स्टोर
रनगवां (छतरपुर) 155.18 डेड स्टोर
बरियारपुर (पन्ना) 12.60 1.62
ओहन (चित्रकूट) 37.75 डेड स्टोर
बरूआ (चित्रकूट) 23.26 डेड स्टोर
रसिन (चित्रकूट) 13.63 3.17
गुंता (चित्रकूट) 24.50 9.30
अर्जुन (महोबा) 58.45 8.49
चंद्रावल (महोबा) 30.86 8.52
कबरई (महोबा) 29.73 15.01
मझगवां (महोबा) 25.92 डेड स्टोर
उर्मिल (महोबा) 113.50 1.03
लहचुरा (महोबा) 13.40 डेड स्टोर
क्योलारी (महोबा) 7.23 डेड स्टोर
मौदहा (हमीरपुर) 179.00 97.80
इनसेट-
मंडल में नहरों से सिंचित क्षेत्रफल
बांदा में केन नहर से 58 हजार 30, औगासी से एक हजार 830, चित्रकूट में ओहन से 30, बरूआ से 120, महोबा में अर्जुन से 150, चंद्रावल से 40, कबरई से एक, मझगवां से 160, उर्मिल से 140 हेक्टेयर। औसतन 61780 हेक्टेयर सिंचाई होनी है।
इनसेट-
पिछले आठ सालों में जून में बारिश (मिमी में)
वर्ष 2011 में 238.90 मिमी, 2012 में 15.70, 2013 में 407.20, 2014 में 49.10, 2015 में 81.15, 2016 में 86.25, 2017 में 30.00, 2018 में 46.70, 2019 में 14.30, 2020 में 186.10, 2021 में 88.14, 2022 में 210.10 मिमी बारिश हुई थी।
वर्जन-
गर्मी से बांधों का पानी सूख रहा है। तालाबों को भरने के लिए नहरों में पानी छोड़ा गया था। अब बांधों में पानी नहीं बचा है। मानसूनी बारिश नहीं हुई तो खरीफ सीजन में किसानों को पानी नहीं मिल पाएगा।
श्यामजी चौबे, अधीक्षण अभियंता सिंचाई प्रखंड, चित्रकूटधाम मंडल, बांदा
