ललितपुर। नाराहट क्षेत्र में स्थित जामनी बांध पर बनी सुरक्षा दीवार जगह-जगह टूटी होने से यहां से निकलने वाले लोगों की सुरक्षा के लिए खतरा बन गई है। इसके साथ यहां की सड़क पर गड्ढे हो चुके हैं। बारिश होने के चलते इन गड्ढों में पानी भर चुका है। जिसके कारण वाहन चालकों को निकलने में काफी परेशानी हो रही है।
बेतवा नदी की मुख्य सहायक नदी जामनी पर जनपद के नाराहट क्षेत्र में वर्ष 1973 में जामनी बांध का निर्माण हुआ था। बांध की लंबाई करीब तीन किलोमीटर और पूर्ण जलस्तर 403.55 मीटर व न्यूनतम जलस्तर 396.39 मीटर है। बांध में पानी की पूर्ण क्षमता 92.80 मिलियन घन मीटर है। बांध के पानी की निकासी के लिए इसमें छह गेट बनाए गए हैं। जिनसे 89,000 हजार क्यूसेक पानी की निकासी की जा सकती है। इसके साथ किसानों को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराने को दो नहरों का निर्माण कराया गया है।
बांध पर लोगों को निकलने के लिए सड़क का निर्माण है। इसके साथ बांध के टॉप पर दोनों ओर पत्थरों की करीब दो से तीन फुट ऊंची सुरक्षा दीवार बनाई गई थी। लेकिन विभागीय अधिकारियों की लापरवाही के चलते यह सुरक्षा दीवार वर्तमान में लोगों की सुरक्षा के लिए खतरा बन गई है। दोनों तरफ बनी यह सुरक्षा दीवार जगह-जगह से टूटकर अलग हो चुकी है। इतना ही नहीं बांध पर बनी डामर की सड़क जीर्णशीर्ण अवस्था में पहुंच गई है। इसमें जगह जगह पर बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं। हाल में हुई बारिश से इन गड्ढों में पानी भर चुका है। इस कारण से वाहन चालकों को यहां से निकलने में काफी परेशानी हो रही है और वाहनों के गिरने का खतरा बना हुआ है।
बांध विश्व बैंक की ड्रिप फेज-2 योजना में चयनित
बांध पुनर्वास और सुधार परियोजना ड्रिप फेेज-2 के तहत विश्व बैंक चयनित किए गए बांधों का आधुनिकीकरण करने के लिए धनराशि देता है। जिसमें विश्व बैंक 70 फीसदी पैसा देता है, जबकि 30 फीसदी धनराशि शासन देता है।
बांध पुनर्वास और सुधार परियोजना ड्रिप फेज-2 के तहत जामनी बांध का जीर्णोद्धार करने के लिए 7.30 करोड़ रुपये की कार्ययोजना को वित्तीय स्वीकृति मिल चुकी है। जिसमें बांध की सुरक्षा दीवार को नये सिरे से निर्माण कराया जाना भी शामिल है। जिसकी निविदा प्रक्रिया जल्द ही शुरू होगी। वहीं बांध की सड़क का नवीनीकरण मानसून के बाद शुरू करवा दिया जाएगा। – इं. सलमान खान, सहायक अभियंता सिंचाई खंड
