ललितपुर। रेलवे स्टेशन पर स्थित जीआरपी थाने की एक इमारत को रेलवे ठेकेदार द्वारा बिना किसी पूर्व सूचना के ध्वस्त दिया गया, जिस समय इमारत की दीवार गिराई गई। उस समय इमारत में एक सिपाही सो रहा था। यह तो गनीमत रही कि वह चोटिल नहीं हुए, इसी इमारत में थाने में जगह न होने के कारण जीआरपी द्वारा मालखाने का सामान रखा जाता था।
रेलवे स्टेशन पर जीआरपी थाने के इमारत काफी पुरानी होने के कारण जर्जर हो चुकी है। इसको लेकर कई बार रेलवे अधिकारियों को सूचित किया गया है। लेकिन थाने के लिए कोई अन्य जगह नहीं दी गई है। पिछले वर्ष अगस्त माह में मालखाने की इमारत खस्ताहाल होने के कारण रेलवे अधिकारियों को मालखाने के लिए नई जगह की मांग के लिए लिखित पत्र भेजा गया था। अधिकारियों ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया। इसके बाद सरकारी दस्तावेजों को थाने के बगल में बनी इमारत में रख दिए, इसमें दो सिपाही भी निवास करते थे।
सोमवार देर रात में जीआरपी पुलिस को बिना किसी सूचना के इस इमारत को धराशायी कर दिया गया, जबकि उस समय एक जीआरपी कांस्टेबल साहिब सिंह वहां पर सो रहा था। दूसरा सिपाही मालखाना मुंशी प्रमोद कुमार अवकाश के कारण उस समय वहां पर नहीं था। हेड कांस्टेबल साहिब सिंह ने बताया कि उस रात्रि के समय जब हलचल हुई थी, तो ऐसा लगा कि कोई भूकंप आया हो, वह इमारत से तत्काल बाहर निकला, तो देखा कि मशीन के द्वारा उक्त इमारत किया गिराया जा रहा था। सुबह यह खबर पूरे शहर में आग की तरह फैल गई। वहां देखा तो जीआरपी थाने के सरकारी दस्तावेज खुले में पड़ हुए थे, साथ ही सिपाही के कपड़े भी फैले हुए थे। इसकी सूचना प्रभारी निरीक्षक जीआरपी नवीन कुमार द्वारा आलाधिकारियों को दी गई।
इमारत को गिराने की कोई सूचना पहले से नहीं थी। हमारे आवास को गिराने के लिए सूचित किया गया था। जिससे हमने खाली कर दिया था।
– नवीन कुमार, प्रभारी निरीक्षक, जीआरपी
इमारत केे गिराने के लिए पूर्व में सूचित करने की बात जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा कही जा रही रही है। यहां आरपीएफ थाने की नवीन इमारत प्रस्तावित थी, इसके लिए यह इमारत गिराई गई है। – मनोज कुमार, पीआरओ, डीआरएम झांसी
