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ब्लॉक जखौरा के ग्राम नौहरकलां में वित्तीय वर्ष 2020-21 में बनाई गई थी सड़क

संवाद न्यूज एजेंसी

ललितपुर। ब्लॉक जखौरा के ग्राम नौहरकलां में मनरेगा के तहत बनाई गई पांच लाख रुपये लागत की सड़क सिर्फ कागजों में बना दी गई और इसका भुगतान करा लिया गया। सोशल ऑडिट के दौरान इस सड़क के गायब होने का मामला खुलकर सामने आया। अब इसको लेकर जिला विकास अधिकारी ने मुख्य विकास अधिकारी को पत्र लिखकर पूरे मामले से अवगत कराया है।

जनपद में ग्रामीण क्षेत्रों के मजदूरों को गांव में ही रोजगार देने के साथ ही ग्राम पंचायत की परिसंपतियां तैयार करने के उद्देश्य से महात्मा गांधी ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना का संचालन किया जा रहा है। जरूरी विकास कार्यों की आड़ लेकर इस योजना से गांवों में नाली, सड़क, खडंजा जैसे कई कच्चे-पक्के कार्य कराए जाते हैं। इसके अलावा योजना के लाभार्थीपरक काम भी कराए जा रहे हैं। इन कार्यों में ग्रामीण जनप्रतिनिधि व सचिव मिलकर बड़ा घालमेल करने में जुटे हुए है। वित्तीय वर्ष 2020-21 में ब्लॉक जखौरा के ग्राम नौहरकलां में 5,50,332 रुपये की लागत से करीब करीब ढाई सौ मीटर सोलिंग गिट्टी संपर्क मार्ग का कार्य मैन सड़क से अवतार के खेत बनाया गया था।

सोशल ऑडिट करने गई टीम को यह सोलिंग सड़क मार्ग मौके पर नहीं मिला। टीम ने गांव के लोगों से जानकारी लेकर सड़क तलाशने का काफी प्रयास किया। जबकि यह सड़क कागजों पर निर्मित थी और एमआईएस के अनुसार सोलिंग संपर्क मार्ग निर्माण पर श्रमांश के रूप में 179493 रुपये और सामग्री पर 370839 रुपये का खर्च होना बताते हुए भुगतान भी हो चुका था। इस संबंध में जब सोशल ऑडिट टीम ने पत्राचार किया तो बताया गया कि उक्त सड़क का निर्माण पूर्ण है।

इस पर जिला विकास अधिकारी केएन पांडेय स्वयं मौके पर निरीक्षण करने के लिए पहुंचे। लेकिन उन्हें भी यहां कोई सड़क निर्मित नहीं मिली। जबकि नरेगा विभाग व खंड विकास अधिकारी जखौरा की रिपोर्ट में भी सड़क निर्मित होने का दावा किया। अब इस गायब हुई सड़क को खोजने के लिए जिला विकास अधिकारी ने मुख्य विकास अधिकारी को पत्र लिखकर सूचना दी है। सूत्रों के अनुसार सीडीओ ने इस मामले को गंभीरता से लिया है और वह इस गड़बड़ी की जांच करने के निर्देश दे दिए है।

खंड विकास अधिकारी ने एटीआर में सड़क बताई पूर्ण

ऑडिट टीम ने मनरेगा की साइट पर इस संबंध में एटीआर की स्थिति देखी तो पाया गया कि कार्यक्रम अधिकारी/खंड विकास अधिकारी जखौरा के स्तर से एटीआर अपलोड किया गया है। जिसमे रोड का मापांकन माप पुस्तिका में 210 मीटर किया गया। जोकि मौके पर सही पाया गया और मौके पर 230 मीटर कार्य कराया गया। जबकि वास्तविक लंबाई से 20 मीटर अधिक है। लाखों की सड़क सोशल ऑडिट में गायब मिलने को लेकर मनरेगा विभाग के अधिकारी दावा कर रहे हैं कि कार्य को मौके पर करा दिया गया है। जबकि सोशल ऑडिट टीम के सदस्य अब भी कह रहे हैं कि उन्होंने गांव में जानकारी ली और मौके पर सत्यापन किया। जिसमें पाया गया कि काम अभी भी नहीं कराया गया है।

जिस जगह स्थान पर सड़क निर्माण होना था। वहां पर एक खेत स्वामी विवाद करने लगा था। जिस कारण से यह सड़क वहां निर्मित नहीं कराकर, दूसरी जगह पर निर्मित करा दी गई थी। यह जरूर रहा कि सड़क निर्माण के स्थानांतरण को लेकर ग्राम पंचायत की निर्माण समिति व ग्राम प्रशासनिक समिति ने इसे कार्रवाई रजिस्टर में शामिल नहीं किया। इसी कारण से सोशल ऑडिट में यह सड़क गायब पाई गई है। रवींद्रवीर यादव, डीसी मनरेगा



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