चित्रकूट। जगद्गुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग विश्वविद्यालय को सरकार की ओर से राज्य विश्वविद्यालय का दर्जा दिए जाने पर शिक्षकों, छात्राओं और कर्मचारियों ने खुशी जताई है। यह भी स्पष्ट हो गया कि विवि के कुलाधिपति जगदगुरु ही आजीवन बने रहेंगे। इस पर विवि परिसर में जगद्गुरु और सीएम योगी को धन्यवाद प्रेषित किया गया।
धर्मनगरी स्थित जगद्गुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग विश्वविद्यालय की स्थापना 26 जुलाई 2001 को जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य महाराज ने की थी। उन्होंने अपनी कथाओं से प्राप्त धनराशि से खोले गए इस विश्वविद्यालय के संचालन के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग और उत्तर प्रदेश सरकार से मानता ली थी। वर्तमान समय में यहां लगभग 1600 दिव्यांग छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। इसमें पीएचडी की कक्षाएं भी संचालित हैं।
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने यहां के आजीवन कुलाधिपति जगद्गुरू रामभद्राचार्य महाराज को सभी विषयों में पीएचडी कराने का अधिकार दिया है। कई दौर की वार्ता होने के बाद बुधवार को लखनऊ में उत्तर प्रदेश की कैबिनेट बैठक में राज्य विश्वविद्यालय का दर्जा मिलने पर यहां शिक्षकों, छात्रों और कर्मचारियों ने प्रसन्नता का इजहार किया।
इस निर्णय पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. शिशिर कुमार पांडेय, चेयरमैन नरेंद्र गुप्ता,बांदा चित्रकूट कोआपरेटिव बैंक के अध्यक्ष पंकज अग्रवाल, पहाडी ब्लाक प्रमुख सुशील द्विवेदी, पीआरओ एसपी मिश्रा आदि ने खुशी जाहिर की है।
जगद्गुरू रामभद्राचार्य दिव्यांग राज्य विश्वविद्यालय में दृष्टिबाधित, श्रवण बाधित और अस्थिबाधित समेत तीन प्रकार के दिव्यांगजन शिक्षा गृहण कर रहे हैं। यहां उत्तर प्रदेश के अलावा बिहार, उड़ीसा, राजस्थान, मध्यप्रदेश, पश्चिम बंगाल, उत्तराखंड के दिव्यांग छात्र भी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। यहां के पढ़े दिव्यांग संगीत, खेल, योग, शिक्षा, ललितकला विभाग में शानदार प्रदर्शन कर चुके हैं। साथ ही यहां से डिग्री हांसिल कर देश के कई राज्यों में शिक्षक समेत विभिन्न पदों पर सेवाएं दे रहे हैं।
