स्वास्थ्य विभाग के पास नहीं है मरीजों के बारे में जानकारी
आर्थिक तंगी से इलाज के लिए परेशान हो रहे मरीज
संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। जनपद में कैंसर मरीजों का स्वास्थ्य विभाग के पास कोई ब्योरा नहीं है। एक बैठक के दौरान श्रम सेवायोजन विभाग के राज्यमंत्री ने जब जनपद में कैंसर मरीजों विषय में मुख्य चिकित्सा अधिकारी से जानकारी चाही, तो उन्होंने चुप्पी साध ली। डीएम ने कैंसर मरीज व उन्हें किस श्रेणी का कैंसर है। मंत्री ने इसकी सूची तैयार करने निर्देश दिए हैं।
जिले में कैंसर मरीजों की संख्या बढ़ रही है। प्रत्येक माह एक से दो मरीजों के पत्र जिला प्रशासन व जनप्रतिनिधियों को आर्थिक सहायता की मांग को लेकर प्राप्त हो रहे हैं। लेकिन इस गंभीर बीमारी का स्वास्थ्य विभाग के पास कोई रिकॉर्ड नहीं है। जिम्मेदार यह कहकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहे हैं, कि जनपद में इसकी जांच व इलाज की सुविधा नहीं है, इसलिए यहां पर कोई रिकॉर्ड मौजूद नहीं है। जिले में अप्रैल से अभी तक जिलाधिकारी कार्यालय में चार मरीजों के प्रार्थनापत्र आए हैं, जिनमें से तीन मरीजों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई गई है। एक मरीज की फाइल जिलाधिकारी के कार्यालय पर लंबित है। जिले में दस से पंद्रह हजार की ही ऐसे मरीजों को आर्थिक मदद की जाती है। इससे अधिक धनराशि के लिए मुख्यमंत्री राहत कोष के लिए आवेदन करना होता है। अगर स्वास्थ्य महकमे द्वारा इन मरीजों को सूची तैयार कर ली जाए तो गंभीर व गरीब मरीजों के लिए शासन से मदद के लिए पहल की जा सकती है।
जिले में कैंसर मरीजों की सूची तैयार नहीं की गई है। रेडक्रॉस के माध्यम से जिलाधिकारी कार्यालय से पत्र आते हैं, ऐसे मरीजों की पत्रावली देखकर उन्हें आर्थिक सहायता के लिए अनुमोदन कर दिया जाता है। अभी तक तीन मरीजों को आर्थिक मदद दिलाई जा चुकी है। जिनमें दो मरीजों को दस-दस हजार रुपये व एक मरीज को 15 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी गई है।
जेएस बक्शी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी
