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Namaz twice in an interval of 45 minutes on Bakrid

शाहजमाल ईदगाह पर ईद उल अजहा की नमाज अदा करते नमाजी
– फोटो : अमर उजाला

विस्तार


अलीगढ़ पुलिस प्रशासन की सख्ती और शहर मुफ्ती खालिद हमीद की अपील काम आई। अलीगढ़ के इतिहास में पहली बार बकरीद की नमाज सड़कों पर नहीं हुई। इसके लिए शाहजमाल ईदगाह में 45 मिनट के अंतराल पर दो बार नमाज अदा कराई गई, ताकि सभी को मौका मिल सके। लोगों ने भी इसको माना और इंतजार करने के बाद नमाज पढ़ी। सड़क पर नमाज नहीं होने पर पुलिस और जिला प्रशासन ने राहत की सांस ली, अधिकारियों ने इसके लिए शहर मुफ्ती और मुस्लिम समाज के प्रबुद्ध लोगों द्वारा साथ देने की सराहना की है। 

अमूमन ईदगाह के बाद मस्जिदों में नमाज होती थी। सुबह 6:30 बजे नई ईदगाह शाहजमाल में हाफिज व कारी शागिल अहमद ने नमाज पढ़ाई। शहर मुफ्ती ने नमाजियों को नबी हजरत इब्राहीम (अस) की सुन्नत के बारे में बताया। 45 मिनट के बाद ही सुबह 7:15 बजे पुरानी ईदगाह में हाफिज औरंगजेब ने नमाज पढ़ाई। दोनों नमाज के दौरान एक भी नमाजी ने सड़क पर नमाज नहीं पढ़ी। शहर मुफ्ती मोहम्मद खालिद हमीद लगातार सड़क पर नमाज न पढ़ने की अपील कर रहे थे। उनकी अपील का ही असर था कि लोगों ने ईदगाह से पहले मस्जिद में नमाज पढ़ी। नई ईदगाह में जमात पूरी होने के बाद पुरानी ईदगाह में होने वाली नमाज का लोगों ने इंतजार किया और उसमें नमाज पढ़ी।

गले मिलते ईद पर बच्चे

ईदगाह शाहजमाल के अलावा जामा मस्जिद ऊपरकोट, शम्सी मस्जिद ऊपरकोट, मस्जिद बू अली शाह टीला, जामा मस्जिद एएमयू, ईदगाह जमालपुर, सर सैयद नगर, जीवनगढ़, भुजपुरा सहित पांच सौ अन्य मस्जिदों में ईद की नमाज पढ़ी गई। प्रशासन ने सुरक्षा और नगर निगम ने साफ-सफाई व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम कर रखे थे। एडीएम सिटी अमित कुमार भट्ट और एसपी सिटी कुलदीप गुनावत ने लोगों को ईद की मुबारकबाद दी। 

गलत कामों की कुर्बानी दें : शहर मुफ्ती

नई ईदगाह में शहर मुफ्ती मोहम्मद खालिद हमीद ने नमाजियों को खिताब करते हुए कहा कि संकल्प लें कि ईर्ष्या, नफरत, गुस्सा, लड़ाई, चुगलखोरी, चोरी जैसे गलत कामों की कुर्बानी देंगे। अगर हम इसकी कुर्बानी देंगे जो जिंदगी में अल्लाह की राह पर चलना और आसान होगा। उन्होंने कहा कि बकरीद पर होने वाली बकरों, दुंबा, भेड़, ऊंट और पड्डों की कुर्बानी नबी हजरत इब्राहीम की (अस) सुन्नत है। अल्लाह ने हजरत इब्राहीम (अस) से ख्वाब में अपनी पसंद की चीज उनकी राह में कुर्बान करने को कहा। अगले दिन उन्होंने बकरों-दुंबा को कुर्बान कर दिया। दोबारा ख्वाब में कहा, पसंदीदा चीज कुर्बान करो। अगले दिन ऊंट को कुर्बान कर दिया। अगली रात ख्वाब में फिर कहा, सबसे पसंद की चीज कुर्बान करो। 

अगले दिन उन्होंने बेटे हजरत इस्माइल (अस) को अल्लाह की राह में कुर्बान करने के लिए सुनसान इलाके में ले गए। इस दौरान शैतान ने उनके बेटे और उनकी बीवी को भड़काने की कोशिश की। सभी ने शैतान पर लानत भेजी। कहा, अल्लाह अगर उनकी कुर्बानी चाहते हैं, तो वह तैयार हैं। जब हजरत इब्राहीम (अस) ने बेटे हजरत इस्माइल (अस) ने गले पर छुरी फेरा, तब गर्म खून से उनके हाथ गर्म हो गए। अपनी आंखों से पट्टी खोली तो देखा बेटे की जगह दुंबा है और बेटे अलग खड़े होकर मुस्करा रहे हैं। शहर मुफ्ती ने कहा कि तभी से जायज जानवरों पर कुर्बानी साहिबे निसाब पर वाजिब हो गई। अल्लाह की राह में जानवरों की कुर्बानी देना हजरत इब्राहीम की सुन्नत है। 



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