बांदा। बबेरू कोतवाली क्षेत्र में गुरुवार रात हुए हादसे में मरने वालों की संख्या सात हो गई है। सीएचसी से रेफर जाहिद ने रास्ते में दम तोड़ दिया था। जबकि उसके भाई को जिला अस्पताल से मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। हादसे में मरने वालों में एक ही परिवार के छह सदस्य शामिल हैं। जबकि सातवां मृतक आशीष भी यहीं का निवासी था। इलाकाई लोगों का कहना है कि मृतकों के परिजनों को त्योहार का दिन जिंदगी भर का गम दे गया है।
गुरुवार को बकरीद का त्योहार था। तिलौसा गांव निवासी मुजाहिद उर्फ कल्लू (22) पुत्र मुजीर्बुहमान परिवार व दोस्त के साथ त्योहार मना रहा था। शाम करीब सात बजे मुजाहिद हैंडपंप में उतरे करंट की चपेट में आ गया। चीख सुनकर मां सैरबानो, भाई सोहेल (13) पहुुंचे और स्विच ऑफ कर उसे अलग किया और आनन-फानन बोलेरो मंगाई। बोलेरो में इन तीनों के अलावा परिवार के शकील, कैफ, जाहिल (33) और जाहिद (35) के साथ गांव निवासी आशीष (20) पुत्र राजबहादुर भी सवार हो गए। कल्लू को लेकर सभी बेर्रांव के अस्पताल पहुंचे।
जहां हालत गंभीर होने पर उसे लेकर बबेरू सीएचसी लेकर जा रहे थे। रास्ते में परइयादाई स्थान के पास रोड पर खड़े ट्रक से बोलेरो टकरा गई थी। इससे बोलेरो में सवार कल्लू, उसका भाई सोहेल, चचेरे भाई कैफ, सकील, मां सैरबानों और दोस्त आशीष की मौके पर मौत हो गई थी। जबकि कल्लू के चाचा जाहिल व जाहिद को सीएचसी से जिला अस्पताल रेफर किया गया था। जिला अस्पताल ले जाते समय जाहिद ने रास्ते में दम तोड़ दिया। जाहिल की हालत गंभीर होने पर मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। उसकी हालत अभी भी नाजुक बनी हुई है। शुक्रवार को पंचनामा भरकर पुलिस ने पोस्टमार्टम के बाद शव परिजन को सौंप दिए।
तिलौसा निवासी मुजीर्बुहमान मुंबई में रहकर मजदूरी करते हैं। उनके परिवार में पत्नी सैरबानों के अलावा तीन बेटो में मुजाहिद उर्फ कल्लू सबसे बड़ा और सोहेल दूसरे नंबर का था। जबकि शोएब सबसे छोटा है। हादसे में कल्लू के अलावा भाई सोहेल व मां सैरबानों की मौत हो गई थी। इसके साथ ही चचेरे भाई कैफ व सकील और चाचा जाहिद समेत परिवार के छह सदस्यों की एक साथ मौत हो गई। कल्लू पिता के साथ मुंबई में मजदूरी करता था। वह बकरीद का त्योहार मनाने 15 दिन पहले घर आया था। उसका भाई सोहेल छतरपुर के मदरसा में पढ़ता था। वह भी एक सप्ताह पहले ही घर आया था। इसी तरह कैफ भी मुंबई में मजदूरी करता था, वह चार भाइयों में सबसे बड़ा था। सकील पिता के साथ खेती किसानी करता था व चार भाइयों में सबसे छोटा था। जाहिद गांव में रहकर मजदूरी करता था। वह चार भाइयों में सबसे छोटा था। उसकी शादी हो चुकी थी। परिवार में पिता अजमद के अलावा, पत्नी हाजिया बानों और छह माह की बच्ची हैं।
हादसे में मरे गांव निवासी आशीष व कल्लू आपस में दोस्त थे। आशीष गुरुवार को कल्लू के यहां बकरीद का त्योहार मनाने गया था। इसी दौरान कल्लू के करंट की चपेट में आने से वह भी बोलेरो में सवार होकर इलाज कराने जा रहा था। इसी दौरान हादसे का शिकार हो गया था। पिता राजबहादुर ने बताया कि आशीष बांदा में रहकर सेना में भर्ती की तैयारी कर रहा था। वह कुछ दिन पहले ही गांव पहुंचा था। वह तीन भाइयों में सबसे बड़ा था।
बोलेरो गांव निवासी हासिम की थी। उसे जाहिद चला रहा था। करंट लगने से कल्लू की हालत गंभीर थी। उसे जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचाने के प्रयास में वह बोलेरो करीब 120 किमी. की रफ्तार से दौड़ा रहा था। इसके बाद भी सीट बेल्ट नहीं लगाए था। ऐसी चर्चा है कि रोड पर खड़े ट्रक पर अचानक नजर पड़ी, लेकिन तेज रफ्तार के कारण ब्रेक लगाने के दौरान सीट बेल्ट नहीं लगी होने से वह बोलेरो पर नियंत्रण नहीं रख सका। इसके चलते बेकाबू बोलेरो ट्रक में घुसने से इतना बड़ा हादसा हो गया। ग्रामीणों में चर्चा थी कि यदि रफ्तार कम होती व सीट बेल्ट लगी होती तो हादसे से बचा जा सकता था।
