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ललितपुर। ज्योतिष पीठाधीश्वर जगदगुरू शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने धर्मांतरण कराने वालों को चुनौती देते हुए, कहा कि भोली भाली जनता को बहकाने की जगह हमें अपने धर्म की विशेषता समझाएं, लेकिन अभी तक मेरे पास कोई ऐसा व्यक्ति नहीं आया। क्योंकि वह जानते हैं कि उनकी हालत कालनेमी जैसी हो जाएगी। यदि हम अपने भाई बहनों को इसी तरह बना दे तो किसी की दाल नहीं गलेगी।

श्रीतुवन मंदिर परिसर में आयोजित अभिनंदन समारोह में बोलते हुए, उन्होंने कहा कि धर्मांतरण के कारण ही कई लोगों ने अपना धर्म बदला है, जो कभी हमारे भाई बहन हुआ करते थे, लेकिन वह आज हमारे खिलाफ हैं। बिना विचार के कोई भी काम नहीं करना चाहिए। यदि आप ऐसा करेंगे तो हंसी का पात्र बनेंगे। गुरू के बिना ज्ञान संभव नहीं है।

किसको हम राम कहें और किसे हम श्याम कहें। राम का क्या आचरण है और रावण का क्या आचरण है, जब हमारे सामने दोनों वस्तुएं रखी जाएगी, तब हम तय कर सकेंगे कि हमें किस ओर जाना है। हिंदु धर्म का मतलब यह कतई नहीं है कि पीला दुपट्टा धारण कर लिया और माथे पर तिलक लगा लिया। हमें उच्च गुणों को धारण करना होगा।

जनपद की सीमा पर महामंडलेश्वर चंडी पीठाधीश्वर ने शंकराचार्य की अगवानी, वहीं तुवन मंदिर में महंत रामलखनदास ने अगवानी की। इस मौके पर जिला पंचायत अध्यक्ष कैलाश निरंजन, मुन्नालाल जैन, प्रदीप चौबे, बब्बू राजा गुढा, निखिल तिवारी, गंधर्व लोधी, केदारनाथ तिवारी, विलास पटैरिया, वीके सरदार, नीलू तिवारी, राजीव बबेले, महेंद्र अग्रिहोत्री, पार्षद आलोक मयूर, गिरीश पाठक, रमेश श्रीवास्तव गांधी, अनुराग शैलू, मनीष अग्रवाल, महेश श्रीवास्तव, सतेंद्र सिसौदिया, अज्जू बाबा, राहुल चौबे, पार्थ चौबे, वैभव गुप्ता, अभिषेक नायक, अंकित नायक आदि उपस्थित रहे। संचालन डॉ. ओमप्रकाश शास्त्री ने किया।



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