बारिश के सीजन में सर्पों ने 184 को डसा, 83 की जान गई
– समय रहते इलाज मिलने से 101 लोगों की बच गई जान
– सावधानी बरतने से रुक सकती हैं सर्पदंश की घटनाएं
संवाद न्यूज एजेंसी
बांदा। बारिश के सीजन में सर्पों के बिल में पानी भर जाता है, इससे जान बचाने के लिए बस्ती का रुख करते हैं। मकानों में छुपकर बैठ जाते हैं। इससे सर्पदंश की घटनाएं बढ़ जाती हैं। सर्पदंश के 70 फीसदी केस बारिश के सीजन में ही होते हैं। पांच सालों में पिछले साल जनपद में सर्वाधिक 184 लोगों को सर्प ने डसा, इनमें से 83 लोगों की जान चली गई। सावधानी बरतने से सर्पदंश से होने वाली मौतों को रोका जा सकता है।
कनवारा की रोहिणी सात जुलाई 2022 की सुबह खाना पकाने के लिए कंडा (उप्पल) निकालने गईं थी। वहीं पर छिपे जहरीले सर्प ने उसे डस लिया। परिजन पहले झांड़-फूंक में पड़े रहे। जब हालत गंभीर हो गई तो उसे लेकर अस्पताल पहुंचे। जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। सात जुलाई को बदौसा की रनिया, बच्चों सहित घर के बाहर लेटी थी। चारपाई पर चढ़े सर्प के डसने से दो बच्चों को मौत की मौत हो गई। 23 जुलाई को महुआ की रोशनी (14) पशुओं के लिए चारा काटने गई थी। जहां सर्प ने डस लिया। परिजन जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। इस प्रकार पूरे साल में सर्पों ने 184 को डसा, जिसमें से 83 की जान चली गई। जबकि समय रहते इलाज मिलने से 101 की जान बच गई। इस सब की वजह लापरवाही रही। सर्तकता बरती जाये तो सर्प दंश की घटनाओं से बचा जा सकता है।
पांच सालों में सर्पदंश से मौतें
वर्ष सर्प दंश की घटनाएं
2018-19 19
2019-20 24
2020-21 52
2021-22 54
2022-23 83
जहर से ज्यादा घबराहट से मौत
डॉक्टर विनीत सचान का कहना है कि सर्पदंश में जहर से ज्यादा घबराहट में आए हार्टअटैक से मौतें होती हैं। सर्प दंश से पीड़ित व्यक्ति को समय रहते एंटी स्नेक वेनम इंजेक्शन लगा दिया जाए तो 90 फीसदी जान बचने की संभावना रहती है। वैसे सर्पों की अनेक प्रजातियां हैं। लेकिन पांच फीसदी ही सर्प कोबरा आदि जहरीले होते हैं। जहरीले सर्प में न्यरोपैरालिटिक जहर होता है। इस जहर से मांस पेशी काम करना बंद कर देती हैं। सांस लेने में दिक्कत होने लगती है।
सर्पदंश के लक्षण
सर्प दंश वाली जगह पर दर्द, सूजन, ऐठन और दांतों के दो निशान पाए जाते हैं। त्वचा के रंग में बदलाव आने के साथ ही बेहोशी और मुंह से झाग आने लगात है। प्यास अधिक लगना, पूरे बदन में पसीना आना और घाव से खून बहना आदि सर्प दंश के लक्षण हैं।
ये रखें सावधानी
सर्पदंश के बाद हाथ-पैर हिलाएं नहीं, वरना जहर का प्रसार बढ़ जाएगा। जिस जगह सांप ने डसा है, उस स्थान पर बांधे नहीं। इससे कई बार खून का प्रसार बंद हो जाता है। सर्पदंश के बाद जलाएं नहीं व चीरा न लगाएं, बल्कि तत्काल अस्पताल लेकर पहुंचें।
