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संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा

Updated Wed, 26 Jul 2023 12:56 AM IST

बांदा। बारिश कम होने से धान की फसल को संकट खड़ा हो गया है। 50 फीसदी किसान खेतों में धान की रोपाई तक नहीं कर पा रहे। जिन्होंने रोपाई कर दी है गर्मी व बारिश न होने से पौधे कुम्हला रही हैं।

कृषि विभाग के इस वर्ष 1.22 हेक्टेयर में खरीफ की बुआई व धान की रोपाई का लक्ष्य रखा है। जिले में तहसील अतर्रा व नरैनी बेल्ट में सर्वाधिक 60 हजार हेक्टेयर में धान की रोपाई की जाती है। कृषि वैज्ञानिकों की माने तो जून से जुलाई माह के दो महीनों में बेहतर खरीफ की फसल के जनपद में 305 मिली मीटर बारिश होना चाहिए। लेकिन इस वर्ष महज 264 मिली मीटर बारिश हुई है। मजे की बात तो यह है कि विगत सालों में सभी जगह समान रूप से बारिश होती थी। लेकिन इस वर्ष कहीं कम तो कहीं ज्यादा हुई है। धान वाली बेल्ट में बहुत कम बारिश हुई। जिन किसानों ने नहर व नलकूप से पानी लेकर धान की रोपाई कर दी है उनकी पौध गर्मी व पानी न मिलने से कुम्हला रही है। कई जगह पौधे पीली पड़ गई है। बारिश पर निर्भर 50 फीसदी किसान धान की रोपाई भी नहीं कर पाए है। हर रोज बारिश का इंतजार कर रहे है। प्रगतिशील किसान प्रेम सिंह (बड़ोखर खुर्द) का कहना है कि ठीकठाक बारिश नहीं हुई तो धान की फसल चौपट हो जाएगी। तिल में पूरा दाना नहीं पड़ सकेगा। खरीफ ही नहीं अगली रबी की फसल में भी खतरे के बादल मंडरा सकते हैं। जिला कृषि अधिकारी डा. प्रमोद कुमार का कहना है कि मानसून की सीजन 15 सितंबर तक होता है। बारिश कम तो हुई लेकिन पिछले साल से 50 फीसदी अधिक हुई है। आगे भी बारिश की संभावना जताई जा रही है।



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