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बांदा। जिले में रविवार को आयोजित आरोग्य मेला के 15 कैंपों में डॉक्टर ही नहीं पहुंचे, जबकि एक शिविर में पैरामेडिकल स्टाफ के बगैर चिकित्सक ने मरीजों का चेकअप किया। चिकित्सक और स्टाफ की कमी से जूझ रहे स्वास्थ्य विभाग की इस स्थिति की वजह से जिस उद्देश्य से मुख्यमंत्री आरोग्य मेले का आयोजन हो रहा है, वह पूरा नहीं हो पा रहा है।

रविवार अवकाश दिवस पर मरीजों को इलाज के लिए भटकना न पड़े, इसलिए सरकार ने मुख्यमंत्री आरोग्य मेले का आयोजन शुरू कराया। जिले में यह मेला शहर की दो सहित पूरे जिले में 46 नई पीएचसी पर लगता है। लेकिन, स्टाफ की कमी से जूझ रहे स्वास्थ्य विभाग के इस मेले में कई शिविर में डॉक्टर ही नहीं पहुंच पाते हैं। इस वजह से मरीजों को सही इलाज नहीं मिल पाता है। शिविर में उपचार से असंतुष्ट मरीजों को निजी अस्पताल या फिर झोलाछापों के चक्कर में पड़ना पड़ रहा है। रविवार को 31 नई पीएचसी में 37 डॉक्टर पहुंचे थे, जिसमें छह न्यू पीएचसी में दो-दो चिकित्सक की ड्यूटी लगाई गई। हथौड़ गांव के पीएचसी में चिकित्सक तो थे, पैरामेडिक स्टाफ नहीं था।

इन न्यू पीएचसी में नहीं थे डॉक्टर

गांवो अछरौंड़, बड़ौखर बुजुर्ग, बिसंडी, दभानी, देवरार, गोयरामुगली, कैरी, कुसुमा, लुक्तरा, मझीवां, नंदवारा, रायन, साथी, शिव, सिंधनकलान

गंभीर हो रही आई फ्लू बीमारी, 19 रेफर

बांदा। जिले में लगे आरोग्य मेले में 1067 मरीजों का उपचार हुआ। इसमें आई फ्लू के 24 मरीजों में 19 की स्थिति बेहद खराब थी। उन्हें फौरन रेफर कर दिया गया। यही नहीं गर्मी के कारण हाइपरटेंशन के मरीज भी बढ़ रहे हैं। कैंपों में 16 मरीजों ने चेकअप कराया। 70 मरीज स्किन ओर 66 मरीज बुखार के पहुंचे।

डॉक्टर से मांगा जाएगा स्पष्टीकरण

बदौसा/बबेरू/नरैनी। बदौसा में आयोजित आरोग्य मेले में डॉक्टर नहीं पहुंचने पर मरीजों को काफी परेशानी हुई। चिकित्सा अधीक्षक नरैनी डॉ. बिपिन शर्मा के अनुसार गैरहाजिर चिकित्सक से स्पष्टीकरण मांगा जाएगा। यहां 14 मरीजों को फार्मासिस्ट द्वारा दवा दी गई। न्यू पीएचसी आहार गांव में सबसे ज्यादा 77 मरीज पहुंचे। नरैनी के नौ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में 151 ने उपचार कराया, सबसे ज्यादा डायरिया के मरीज पहुंचे।



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