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फोटो क्रमांक = 1कैप्सन – राजकीय बालिका इंटर कॉलेज

संवाद न्यूज एजेंसी

तालबेहट। बेटियों को शिक्षित बनाने के लिए सरकार तमाम कोशिश कर रही है लेकिन नगर के राजकीय इंटर कॉलेज में शिक्षकाओं सहित स्टाफ की भारी कमी है जिससे छात्राओं की पढ़ाई प्रभावित हो रही। हैरत की बात तो यह है कि तीन हजार से अधिक छात्राओं को पढ़ाने के लिए दस के सापेक्ष कोई प्रवक्ता नहीं है और एलटी ग्रेड के 25 पदों के सापेक्ष मात्र आठ ही पद भरे हुए है। इससे अभिभावकों और क्षेत्र के लोगों में शिक्षा विभाग के उच्चाधिकारी एवं जनप्रतिनिधियों को लेकर काफी आक्रोश है

नगर एवं क्षेत्र की छात्राओं को इंटरमीडिएट की पढ़ाई के लिए विकास खंड में एक मात्र बालिका इंटर कॉलेज है। लगभग तीन वर्ष पहले इस विद्यालय में इंटर विज्ञान वर्ग की कक्षाए शुरू की गई। एक वर्ष पहले इंटर गणित की कक्षाएं शुरू हुई। वर्तमान में यहां गणित, भौतिक, रसायन, जीव विज्ञान सहित कई महत्वपूर्ण विषयों के प्रवक्ता नहीं है। इससे छात्राओं को अपनी पढ़ाई करने में भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। शिक्षकों के अलावा चपरासी और कार्यालय में भी कर्मचारियों का अभाव है। जिसके चलते अभिभावक संघ से अध्यापिकाओं को रखकर काम चलाया जा रहा है।

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– मानविकी, विज्ञान और व्यवसायिक विषयों की होती है पढ़ाई

पहले इस कॉलेज में मात्र कला वर्ग के अध्ययन की सुविधा थी। लेकिन लगभग तीन वर्ष पहले मानविकी और एक वर्ष पहले विज्ञान इंटर वर्ग की कक्षाएं शुरू होने से छात्राओं की संख्या बढ़ गई है।

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एक वर्ष से चल रहा प्रयोगशालाओं को निर्माण

इस कॉलेज में विज्ञान वर्ग की तीन प्रयोगशालाओं का निर्माण लगभग एक वर्ष से चल रहा है। निर्माण कार्य की गति धीमी होने के कारण छात्रात्रों को प्रक्टीकल का लाभ नहीं मिल पा रहा है। जबकि विज्ञान में प्रक्टीकल का बड़ा महत्व होता है।

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– अध्यापिकाओं की कमी के चलते शिक्षण कार्य में व्यवधान होता है। इस संबंध में उच्चाधिकारियों को कई बार अवगत करा दिया गया है। अध्यापक अभिभावक संघ से काम चलाया जा रहा है। – अंजना वर्मा, प्रधानाचार्य जीजीआईसी तालबेहट

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– अध्यापिकाओं की काफी समय से भारी कमी है। छात्राओं की परेशानियों को ध्यान में रखते हुए उच्चाधिकारियों को इस कमी को दूर करना चाहिए। – विनोद करौलिया,पूर्व अध्यक्ष अभिभावक शिक्षक संघ

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– क्षेत्र में छात्राओं के विज्ञान एवं कला वर्ग का एक मात्र इंटर कॉलेज होने से अधिकांश गरीब अभिभावक अपने बच्चों को यही प्रवेश दिलाते है। अभिभावक संघ से अध्यापिकाएं रखने पर कुछ लोगों को आपत्ति भी रहती है। – डॉ.सतेंद्र बुंदेला, प्रतिनिधि जिला पंचायत सदस्य थाना क्षेत्र



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