ललितपुर। उत्तर प्रदेश साहित्य सभा की स्थानीय इकाई की मासिक काव्य-गोष्ठी संजय कटारे के गांधी नगर स्थित आवास पर संपन्न हुई जिसमें कवियों ने अपनी रचनाए सुनाई।
गोष्ठी में कवि अखिलेश शांडिल्य ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। कवि सुदेश सोनी ने कहा,प्यार के दीप जो नैनों में जलाए होते, दिल की बस्ती में अंधेरे ना छाए होता। कवि महेश नामदेव ने पक्तियां पेश की, गज पर ही कुएं खुद गए तल किसने देखा है जी, केवल प्रश्न उछलते देखे हल किसने देखा है जी। कवि पंकज अंगार ने पंक्तियां पेश की, यदि तुम मोल लगाने निकले तो हम महंगे बहुत मिलेंगे।कवि वीरेंद्र विद्रोही ने किसानों का दर्द पढ़ा,उड़ गई बारिश हवा में आग पानी हो गई। कितनी महंगी आज तो खेती किसानी हो गई। इस मौके पर कवि केके पाठक,अखिलेश शांडिल्य,कवि पुरुषोत्तम नारायण पस्तोर, शकील मास्टर,कवियत्री मंजू कटारे ने काव्यपाठ किया। काव्य गोष्ठी की अध्यक्षता रमेश पाठक ने एवं संचालन बृज मोहन संज्ञा ने किया। संस्था के संयोजक कवि महेश नामदेव ने कवियों और श्रोताओं का आभार व्यक्त किया।
