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नरैनी। अतर्रा कस्बे के सुलक थोक निवासी नील कमल उर्फ गब्बर की बागै नदी स्थित खूनी चट्टान इलाके में डूबकर मौत होने पर पुरानी घटनाएं भी ताजा हो गईं। अब तक इस चट्टान से 15 लोगों की मौत हो चुकी है।

तहसील क्षेत्र के प्रसिद्ध गुढ़ा कला के हनुमान मंदिर के बगल में बह रही बागै नदी की जलधारा में मौजूद खूनी चट्टान ने मंगलवार को अतर्रा कस्बे के नीलकमल की जान ले ली थी। शासन-प्रशासन की लापरवाही से इस खूनी चट्टान को तोड़ा नहीं जा सका है।

नरैनी-कालिंजर मार्ग पर गुढ़ा कला पुलिस चौकी से महज तीन किलोमीटर दूर प्रसिद्ध हनुमान जी का मंदिर है। इसके बगल से बागै नदी बहती है। धार्मिक आस्था के चलते प्रतिदिन सैकड़ों भक्त मूर्ति में जलाभिषेक करते हैं। यह खूनी चट्टान नदी के बीचोंबीच स्थित है।

अक्सर बच्चे नहाते समय पानी की जलधारा में फंसकर भंवर में फंस जाते हैं। अभी तक खूनी चट्टान में 15 लोगों की मौत हो चुकी है। पूर्व में हुई मौतों पर शासन-प्रशासन ने इस मामले को संज्ञान में लिया था। तत्कालीन मंत्री स्व. विवेक सिंह की पहल पर इस खूनी चट्टान को तोड़े जाने का आदेश भी दिया गया था। मगर यह चट्टान टस से मस नहीं हुई थी।

वर्ष 1985 में मध्य प्रदेश के खोरा गांव निवासी मुन्ना (13)

. वर्ष 1987 में रजिया पुरवा निवासी रामकिशोर (11)

. वर्ष 1991 में गुढ़ा कला निवासी मुन्ना प्रजापति (10)

. वर्ष 1995 में नौगवां गांव का पप्पू (11)

. वर्ष 2001 में सोनू (8) व रज्जन (9)

. वर्ष 2014 में नरैनी निवासी सुलोचन (15)

. वर्ष 2015 में नरैनी कस्बा निवासी विष्णु (18)

. वर्ष 2018 में मूड़ी गांव का वीर सिंह (10)

. वर्ष 2023 में अतर्रा कस्बा निवासी नीलकमल (26)



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