बांदा। सात वर्ष 11 माह पूर्व अनुसूचित जाति की युवती के साथ प्रेम विवाह के मामले में बहू की हत्या व अनुसूचित जाति एक्ट में दोषी ससुर को विशेष न्यायाधीश एससीएसटी द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश अनुज सक्सेना की अदालत में आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही 42 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। अर्थदंड अदा नहीं करने पर तीन माह अतिरिक्त की जेल काटनी होगी।
विशेष लोक अभियोजक विमल सिंह व डॉ. महेंद्र कुमार द्विवेदी ने बताया कि बबेरू थाना क्षेत्र के परास गांव निवासी गोविंद आरख ने करीब तीन माह पहले अनुसूचित जाति की आरती 26 से प्रेम विवाह किया था। आरोप था कि दोनों की शादी से पिता विशोशर नाराज रहते थे।
आए दिन उसकी पत्नी को परेशान करते थे। तीन दिसंबर 2015 को सुबह जब वह मजदूरी करने चला गया, उसी समय उसकी पत्नी को अकेला पाकर तमंचे से गोली मारकर घायल कर दिया। सूचना पाकर जब वह घर पहुंचा तो उसकी पत्नी घायल थी। उसे स्वास्थ्य केंद्र बबेरू में भर्ती कराया। बाद में उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। इलाज के दौरान पांच सितंबर 2015 को उसकी मौत हो गई।
छह सितंबर 2015 को तत्कालीन नायब तहसीलदार गिरवर सिंह ने उसका पंचनामा भरकर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। मामले का आरोप पत्र दोषी विशोशर के खिलाफ दो दिसंबर 2015 को अदालत में भेजा गया। 19 जनवरी 2016 को आरोपी बनाया गया। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन की ओर से 11 गवाही हुई। पत्रावली में उपलब्ध साक्ष्यों व अधिवक्ताओं के तर्क सुनने के बाद न्यायाधीश ने 31 पृष्ठीय फैसले में विशोशर को दोषी पाते हुए सजा सुनाई। दोषी घटना के समय से ही जेल में था।
