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सिंचाई विभाग ने किया मना, केंद्रीय जल आयोग से अनुमति लेने की कही बात, बांध न भरने से किसान भी हो रहे चिंतित

जनपद में अब तक 546.79 मिमी. ही हुई बारिश, एक मीटर से अधिक खाली है बांध

संवाद न्यूज एजेंसी

ललितपुर। एक मीटर से अधिक खाली पड़े गोविंद सागर बांध को जाखलौन पंप कैनाल से नहीं भरा जाएगा। इसे लेकर सिंचाई निर्माण खंड प्रथम ने राजघाट बांध से पानी लेने के लिए केंद्रीय जल आयोग दिल्ली से अनुमति लेने की बात कही है।

शहजाद नदी पर निर्मित गोविंद सागर बांध जनपद के सबसे पुराने बांधों में शुमार है। इस बांध में प्राचीन पद्धत्ति की साइफन प्रणाली है। इस वर्ष मानसूनी सीजन में जनपद के अन्य बांधों की तरह गोविंद सागर बांध भी एक मीटर से अधिक खाली है। बांध का पूर्ण जलस्तर 363.93 मीटर है लेकिन वर्तमान में बांध 362.86 मीटर ही भर सका है।

उधर, बांध में भरने वाले पानी का 60 फीसदी हिस्सा फसलों की सिंचाई के लिए आरक्षित रखा गया है। जबकि बचे हुए पानी से शहर व रेलवे विभाग को पेयजल आपूर्ति की जाती है। इस वर्ष बांध के उम्मीद के मुताबिक न भरने से किसानों सहित शहर के लोग बेचैन हैं। रबी की फसल की सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता को लेकर लोगों ने जिलाधिकारी से गोविंद सागर बांध को राजघाट बांध के पास बेतवा नदी पर बने जाखलौन पंप कैनाल से भरने की मांग की थी।

डीएम ने इसको लेकर राजघाट निर्माण खंड को पत्र लिखा था। राजघाट निर्माण खंड के अधिशासी अभियंता ने सिंचाई निर्माण खंड प्रथम को पत्र लिखकर राजघाट बांध से उत्सर्जित जाखलौन पंप कैनाल के माध्यम से बांध भरने की मांग की।

उधर, इस पत्र के जवाब में सिंचाई निर्माण खंड प्रथम ने दूसरा पत्र भेजा। जिसमें बताया गया कि राजघाट बांध 371.00 मीटर लेवल तक भरा जाता है। वर्तमान में राजघाट बांध का लेवल 369.20 मीटर है। इस प्रकार से राजघाट बांध अभी पूर्ण क्षमता से नहीं भरा है। इसके चलते राजघाट बांध से पानी दिया जाना संभव नहीं है। पत्र में यह भी कहा गया कि बांध से पानी दिए जाने का निर्णय उनके विभाग के अधिकार क्षेत्र में नहीं है।

कहा गया है कि राजघाट बांध के पानी का बंटवारा बेतवा रिवर बोर्ड व केंद्रीय जल आयोग दिल्ली के अधिकार क्षेत्र में आता है। इस प्रकार से सिंचाई निर्माण खंड प्रथम ने जाखलौन पंप कैनाल से गोविंद सागर बांध को भरने के लिए केंद्रीय जल आयोग दिल्ली से अनुमति लेने की बात कही।

यूपी का राजघाट बांध में 22 टीएमसी पानी का है हिस्सा

राजघाट बांध यूपी-एमपी सीमा पर निर्मित है। इसके लिए यूपी-एमपी की सरकारों के बीच समझौता हुआ था। जिसमें 22 टीएमसी (ट्रिलियन क्यूबिक मीटर) पानी यूपी व 22 टीएमसी पानी एमपी को मिलना तय किया गया था। यूपी अपने हिस्से के 22 टीएमसी पानी में से 8 टीएमसी पानी अन्य उपयोग में लेता है। जबकि 14 टीएमसी पानी को झांसी और पारीछा की मांग के अनुसार छोड़ा जाता है।

केन बेतवा लिंक परियोजना में दो टीएमसी पानी से भरा जाना है गोविंद सागर बांध

केन बेतवा लिंक परियोजना पूरी हो जाने के बाद झांसी और पारीछा सहित अन्य जनपदों में पानी की समस्या नहीं रहेगी। इसके बाद राजघाट बांध में यूपी के हिस्से का पानी बचा रहेगा। इस पर केन बेतवा लिंक परियोजना के तहत गोविंद सागर बांध को दो टीएमसी पानी दिया जाना निर्धारित है। दो टीएमसी पानी गोविंद सागर बांध में आ जाने से शहरी व आसपास के ग्रामीण इलाकों की पेयजल की समस्या काफी हद तक दूर हो सकेगी।

गोविंद सागर बांध को राजघाट बांध के उत्सर्जित जाखलौन पंप कैनाल से भरने के लिए सिंचाई निर्माण खंड प्रथम को पत्र लिखा था, लेकिन राजघाट बांध से पानी के बंटवारे का अधिकार बेतवा रिवर बोर्ड व केंद्रीय जल आयोग दिल्ली के अधिकार क्षेत्र में आना बताया गया है। हालांकि अभी मानसून का सीजन समाप्त नहीं हुआ है। आने वाले दिनों में बारिश होने और गोविंद सागर बांध के भर जाने की उम्मीद है। बावजूद इसके बांध नहीं भरता है तो इसे भरने के लिए आगे पत्राचार किया जाएगा।

-इं. मनमोहन, अधिशासी अभियंता, राजघाट निर्माण खंड



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