बांदा। पुत्रों की सलामती और लंबी उम्र के लिए महिलाओं ने हलछठ पर्व पूरी श्रद्धा के साथ मनाया। व्रत रखा और सज-संवरकर हलछठ माई की पूजा-अर्चना की। फल, मिठाई और सात तरह के अन्न के भुने दाने, मिट्टी के कोढ़उवा में भरकर भोग लगाया। हलछठ माई की कथा सुनी और खुशहाली की कामना की।
मंगलवार को सुबह से महिलाएओं ने मीठे पकवान, खीर व पूजन के लिए देसी घी की पूडिय़ां बनायी। पास पड़ोस की महिलाओं ने एक साथ दोपहर को हलछठ (कांस व तेंदु पत्ता) सजाकर सात प्रकार के अन्न (अनाज) का भोग लगाकर पूजा की और हलछठ की कथा सुनी।
मान्यता है कि हलछठ का व्रत पुत्रों की दीर्घायु व रोगमुक्त जीवन के लिए किया जाता है। हलछठ पूजन से पुत्रों का जीवन खुशहाल होता है। पूजा से साल घर में अन्न की कमी नहीं रहती। इस दिन व्रत रखने वाले महिलाएं खेतों का जोता-बोया नहीं खातीं। उधर, बाजार में मीठे कोढ़उवा, पसई के चावल व फलों की खूब खरीदारी हुई।
उधर, अतर्रा, बबेरू, कमासिन, बिसंडा, तिंदवारी, मटौंध, नरैनी आदि क्षेत्रों में भी हलछठ पूजा की धूम रही। महिलाओं ने पूरा श्रृंगार कर पूजा की और बेटों के लिए लंबी उम्र मांगी।
