बांदा। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) में मजदूरों की मजदूरी में फर्जीवाड़ा नहीं चल सकेगा। आनलाइन हाजिरी के बाद अब मजदूरों के जॉब कार्ड आधार व मोबाइल नंबर से लिंक होंगे। अफसरों को पांच अक्टूबर तक शत प्रतिशत जॉब कार्ड पर आधार व मोबाइल नंबर लिंक करने के आदेश दिए गए है।
प्रदेश की योगी सरकार ने धरातल पर पुख्ता काम कराने और जनता को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से अहम बदलाव किए है। इनमें एक मनरेगा भी है। योजना में अभी तक एक ही मजदूर को कई जगह पर अलग-अलग काम देने व बिना काम के भुगतान करने के आरोप लगते रहे है।
इस पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने मार्च माह से ऑनलाइन हाजिरी अनिवार्य कर दी है। कार्य स्थल पर काम करते समय श्रमिक की नेशल मोबाइल मॉनीटरिंग सॉफ्टवेयर (एनएमएमएस एप) से तीन बार हाजिरी ली जा रही है। इससे 90 फीसदी फर्जीवाड़े पर लगाम लगी है।
अब सरकार ने श्रमिक के जाॅब कार्ड को आधार व मोबाइल से लिंक होना अनिवार्य कर दिया है। ताकि भुगतान पर किसी तरह का फर्जीवाड़ा न हो सके। अफसरों को आदेश दिए गए है कि पांच अक्टूबर तक शत प्रतिशत मजदूरों के जॉबकार्ड आधार व मोबाइल नंबर से लिंक कराए जाए। अन्य भुगतान रोक दिया जाएगा।
जिले में मनरेगा योजना के तहत 3 लाख 53 हजार 179 श्रमिकों के जॉबकार्ड है। इनमें 3 लाख 24 हजार 536 के जॉबकार्ड आधार व मोबाइल से लिंक है। यानि अभी करीब 30 हजार श्रमिकों जॉबकार्ड आधार व मोबाइल से लिंक नहीं है।
उपायुक्त मनरेगा प्रेम नारायण ने बताया कि कोरोना के समय घर लौटे श्रमिकों के जॉब कार्ड बना दिए गए थे। कोरोना खत्म होने के बाद वह वापस महानगर चले गए। जिस कारण सभी के जॉबकार्ड आधार व मोबाइल से लिंक नहीं हो पा रहे है। जल्द जो जॉब कार्ड क्रियाशील नहीं है, उन्हें जांच कराकर हटाया जाएगा।
