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सब हेड… जनरल कोच हों या एसी, सभी जगह बबाल काटे रहते हैं शराबी

अमर उजाला ब्यूरो

झांसी। ट्रेनों में खूब जाम छलकाए जा रहे हैं। शराब के नशे में हंगामे होते हैं। इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि आरपीएफ द्वारा ही पिछले 10 महीनों में ऐसे 70 मामले दर्ज किए जा चुके हैं। बावजूद, ट्रेनों में शराब पीने-पिलाने का सिलसिला थम नहीं रहा है।

बुधवार की रात उप्र संपर्क क्रांति में बीएचयू के सेवानिवृत्त वरिष्ठ वैज्ञानिक डा. जीएन खरे अपनी पत्नी ऊषा खरे के साथ एसी कोच में यात्रा कर रहे थे। इसी बीच कोच में सवार शराब के नशे में धुत दिल्ली निवासी युवक रितेश ने बुजुर्ग दंपती पर पेशाब कर दी थी। दंपती ने युवक को रोकने की कोशिश भी की थी, लेकिन वह नहीं माना और दोनों की लोअर बर्थ पर पेशाब करता रहा। शराबियों द्वारा ट्रेनों में आए दिन इस तरह की हरकतें की जाती हैं। चलती गाड़ी में खुले आम शराब की बोतलें खुल जाती हैं। सह यात्रियों द्वारा रोक-टोक करने पर शराबी उनके साथ झगड़ने लगते हैं। ट्रेनों में शराबी यात्रियों द्वारा हंगामा काटने के हर महीने सात-आठ मामले आरपीएफ तक पहुंचते हैं। इसके अलावा भी तमाम मामले ऐसे होते रहते हैं, जो आरपीएफ तक पहुंच ही नहीं पाते हैं। यात्री चुपचाप शराबियों की हरकतों को सहन करते हुए आगे बढ़ जाते हैं। जनरल कोचों में तो कमोबेश रोजाना ही शराब को लेकर यात्रियों के बीच तनातनी की स्थिति बन जाती है।

आरपीएफ इंस्पेक्टर रविंद्र कौशिक ने बताया कि शराब पीते हुए पकड़े जाने वालों के खिलाफ रेलवे एक्ट के तहत कार्रवाई की जाती है। इसमें छह माह तक की जेल का प्रावधान है।



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